बनारस में बनेगा 'बलूच आंदोलन' का सेंटर

Updated on: 20 October, 2019 05:55 PM
वाराणसी पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस को बलूच आंदोलन का मुख्‍यालय बनाने की तैयारी ने जोर पकड़ा है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्‍म दिवस के बहाने बलूच आजादी का आंदोलन तेज करने की स्क्रिप्‍ट लिखी गई। बलोच रिपब्लिकन पार्टी के अध्‍यक्ष ब्रहमदग बुगती ने नेताजी जयंती पर संदेश भेजने संग जल्‍द बनारस का दौरा करने की बात कही तो बलूच मुख्‍यालय के लिए 'सुभाष भवन' बनाने का ऐलान कर दिया गया। कालजयी उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद के पैतृक गांव लमही में सुभाष भवन बनाने की तैयारी है। इसके लिए जमीन खरीद ली गई है और अगले महीने काम भी शुरू हो जाएगा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती समारोह विशाल भारत संस्‍थान के बैनर तले आयोजित किया गया। इसमें जुटे नन्‍हें-मुन्‍नों ने 'सुनो हिन्‍दू-मुसलमान सुनो, सुभाष की कथा सुनो... नर वो लाजवाब था जिंदा इंकलाब था’ गीत पर डफली के साथ अभिनय कर आजादी के महानायक नेताजी की याद दिलाई। बाल आजाद हिन्‍द सेना की टुकड़ी ने कमांडर तौहीद भारतवंशी की अगुवाई में नेताजी को सलामी दी। बलूच नेता बुगती के संदेश को पढ़ा गया जिसमें उन्‍होंने कहा, 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस दुनिया के ऐसे महान नेता थे जिन्‍होंने गुलामी के खिलाफ आवाज बुलंद की। उनकी प्रेरणा हजारों सालों तक काम करती रहेगी।' इस मौके पर सुभाषवादी नेता डॉ. राजीव श्रीवास्‍तव ने बलूच नेताओं के हवाले से बताया कि आजादी आंदोलन का प्रमुख केंद्र बनारस को बनाया जाना तय है। लमही में बनने वाले भवन से बलूच आंदोलन की गतिविधियों का संचालन होगा। अप्रैल में होगा सम्‍मेलन- विशाल भारत संस्‍थान के अध्‍यक्ष डॉ राजीव श्रीवास्‍तव के मुताबिक संस्‍थान के सीधे सम्‍पर्क में रहने वाले बलूच नेताओं ने आजाद बलूच अस्‍थाई सरकार के गठन की दिशा में तैयारी शुरू कर दी है। अप्रैल महीने में बनारस में होने वाले अंतरराष्‍ट्रीय सम्‍मेलन में अस्‍थाई सरकार का खाका सामने आएगा। बलूचिस्‍तान की आजादी आंदोलन से जुड़े सभी नेता सम्‍मेलन में शामिल होंगे। बता दें, बनारस सुभाषवादी संगठनों के आंदोलन का प्रमुख केंद्र है। यही पर बीते साल जनता आयोग का गठन हुआ था।
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