चुनाव आयोग का आदेश, बजट में चुनावी राज्यों के लिए विशेष घोषणाएं न की जाएं

Updated on: 14 November, 2019 05:25 AM
नई दिल्ली अब यह बिल्कुल तय हो चुका है कि केंद्र सरकार इस बार एक फरवरी को ही बजट पेश कर इतिहास बनाएगी। पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय बजट को पोस्टपोन करने की याचिका खारिज की, फिर चुनाव आयोग ने भी इसकी अनुमति दे दी। हालांकि चुनाव आयोग ने बजट को लेकर कुछ आदेश जारी किए हैं। इसके मुताबिक बजट में आगामी विधानसभा चुनावों वाले पांच राज्यों को लेकर कोई विशेष घोषणा न की जाए। चुनाव आयोग ने सोमवार को सरकार को आदेश दिया कि बजट के दौरान वित्त मंत्री अपने संबोधन में इन राज्यों से जुड़ी केंद्र सरकार की उपलब्धियों का किसी भी तरह से जिक्र नहीं करें। चुनाव आयोग ने कैबिनेट सेक्रटरी पीके सिन्हा को निर्देश दिया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए ऐसा किया जाए। चुनाव आयोग ने कहा कि चुनावी राज्यों से जुड़ी ऐसी कोई स्कीम की घोषणा न हो जो वोटरों को प्रभावित करे। यूपी, उत्तराखंड, मणिपुर, पंजाब और गोवा में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग ने इन चुनावों को लेकर आचार संहिता जारी कर दी है। ऐसे में विपक्ष मांग कर रहा था कि एक फरवरी को प्रस्तावित केंद्रीय बजट को आगे के लिए टाल दिया जाए। विपक्ष का आरोप था कि केंद्र की बीजेपी सरकार केंद्रीय बजट का इस्तेमाल अपने चुनावी फायदों के लिए कर सकती है। हालांकि चुनाव आयोग ने बजट को आगे टालने की मांग नहीं मांगी, लेकिन अपने निर्देशों से केंद्र सरकार को स्पष्ट कर दिया कि कोई राजनीतिक लाभ न लिया जाए। इस बार का केंद्रीय बजट कई मामलों में ऐतिहासिक है। इस बार रेल बजट अलग से पेश नहीं होगा बल्कि इसे आम बजट में ही शामिल कर लिया गया है। इससे पहले सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने भी 1 फरवरी को बजट पेश करने की सरकार की तैयारी को हरी झंडी दे दी। सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल याचिका में 1 फरवरी को बजट पेश करने से रोकने की गुहार लगाई गई थी। कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि 1 फरवरी को बजट पेश किए जाने से राज्यों के चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ने वाला।
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