बजट 2017: किसानों और आम आदमी पर हो सकती है नजरे इनायत

Updated on: 12 November, 2019 05:06 AM
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को संसद में वर्ष 2016-17 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। हालांकि आगामी बजट के बारे में तो कुछ नहीं कहा गया लेकिन इसमें कुछ ऐसे तथ्यों को जरूर शामिल किया गया है, जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि इन्हें वर्ष 2017-18 के बजट में शामिल किया जा सकता है। यूबीआई सार्वभौमिक बुनियादी आय (यूबीआई) योजना की घोषणा वर्ष 2017-18 के बजट में हो सकती है। आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि जीडीपी की करीब आठ फीसदी राशि अभी लोगों को किसी न किसी रूप में सब्सिडी मिल रही है। इसे यदि यूबीआई के जरिये भेजा गया तो गरीबी हटाने में काफी मदद मिलेगी। इसमें सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी के खाते में जाएगी और लालफीताशाही और बिचौलियों की छुट्टी हो जाएगी। पारा आर्थिक समीक्षा में पब्लिक सेक्टर एसेट रिहेबलिटेशन एजेंसी (पारा) की भी चर्चा है। इसमें कहा गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैकों की बड़ी राशि एनपीए हो चुकी है और इसकी वसूली के लिए एक औपचारिक एजेंसी की आवश्यकता है। इसमें बताया गया है कि कुछ ऐसी ही स्थिति पहले पूर्वी एशियाई देशों में भी थी जहां इसी तरह से निदान निकाला गया। खेती-बाड़ी क्षेत्र पर विशेष आगामी बजट में खेती-बाड़ी क्षेत्र को विशेष तरजीह मिल सकती है क्योंकि नोटबंदी के बावजूद इस क्षेत्र का प्रदर्शन बेहतर रहा है। खुद मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन ने भी स्वीकार कि नोटबंदी के बावजूद इस साल गेहूं और चने की बुआई का रकबा पिछले पांच वर्षों से ज्यादा रहा है। इसी वजह से खेती क्षेत्र की विकास दर में बढ़ोतरी का अनुमान है। हो सकता है कि सरकार इसके लिए कुछ विशेष सहूलियतों की घोषणा करे। विनिवेश वर्ष 2017-18 के बजट में सरकारी कंपनियों के विनिवेश, खासकर रणनीतिक बिक्री पर जोर हो सकता है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि राजनीतिक मतैक्य बना कर नागरिक उड्डयन, बैंकिंग और उर्वरक क्षेत्र में विनिवेश को आगे बढ़ाया जा सकता है।
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