गज्जूपुरवा बिल्डिंग हादसा: बिल्डिंग मालिक की दबंगई और समाजवादी पार्टी कनेक्शन

Updated on: 22 April, 2019 06:25 AM
कानपुर गज्जूपुरवा में जिस कंस्ट्रक्शन साइट का मालिकाना हक महताब आलम का बताया जा रहा है, उसके पीछे की कहानी दिलचस्प है। दबंगई के शौकीन महताब आलम कुछ महीने पहले तक समाजवादी पार्टी के कानपुर शहर अध्यक्ष थे। जाजमऊ की टेनरियों में उनकी तूती बोलती है। बीते दिनों समाजवादी पार्टी में हुई उठापटक के बाद अखिलेश यादव ने महताब का टिकट काट दिया था। वह शिवपाल समर्थक भी बताए जाते हैं। आरोप यह भी लगता है कि महताब ने अपनी दबंगई के बल पर कानपुर में कई जमीनों पर अवैध कब्जे भी किए। सूत्रों के अनुसार, कुछ साल पहले आलम जाजमऊ में ही चमड़े का छोटा-मोटा कारोबार करते थे। धीरे-धीरे उन्होंने कारोबार बढ़ाया और अपनी लेदर प्रोसेसिंग यूनिट खोल ली। उनके भाई इरशाद मिर्जा ने एक समय पर देश की सबसे महंगी फिल्म ताजमहल बनाई थी। बाद में इरशाद के खिलाफ बैंक से रिकवरी नोटिस तक जारी हुए थे। कानपुर में केडीए देता तबाही का लाइसेंस कानपुर के घने बसे इलाकों में पिछले कुछ साल में ऊंची-ऊंची बिल्डिंगों की बाढ़-सी आ गई है। नई सड़क, चमनगंज, बेकनगंज, घुमनी बाजार, शतरंजी मोहाल, बिरहाना रोड, जाजमऊ, केडीए कॉलोनी आदि जगहों पर संकरी-संकरी सड़कों पर खूब अवैध निर्माण हो रहे थे। ज्यादातर साइट्स पर बिल्डिंगों को बड़े-बड़े तिरपालों से ढककर बाहर एक पार्टी विशेष का बोर्ड लगा दिया जाता है। इसके बाद किसी भी अधिकारी की इतनी हिम्मत नहीं होती कि अंदर जाकर मैप चेक करे। केडीए के अफसरों और दलालों के इस गठजोड़ का ही असर था कि बीते कुछ साल में सैकड़ों इमारतें सीज की गईं और सेंटिंग के बाद उनकी सील हटा दी गई। हालांकि कहीं भी निर्माण स्टैंडर्ड के मुताबिक नहीं हुआ। कानपुर के पुराने इलाके में केडीए के जेई को किसी भी बिल्डिंग के निर्माण पर हर महीने 10 हजार रुपये रिश्वत दी जाती है। हर फ्लोर की स्लैब डालने का रेट 30-40 हजार रुपये होता है। काम तय समय में पूरा करना होता है। किसी बड़े अधिकारी के अचानक छापे पर यह रेट डबल हो जाता है। चुनाव डिक्लेयर होते ही कंस्ट्रक्शन तेज गज्जूपुरवा एरिया के लोगों का कहना है कि 4 जनवरी को चुनाव की घोषणा होते ही बिल्डिंग बनाने के काम में बेहद तेजी आ गई थी। हर दिन कम से कम 50-100 मजदूर काम कर रहे थे। आसपास के लोगों ने इसका विरोध किया तो आलम और उसके गुर्गों ने धमकाकर चुप करा दिया। इसी तरह शहर में ग्रीन पार्क के पीछे चुनाव घोषित होने के बाद गंगा के 200 मीटर के दायरे में ही नई बिल्डिंग बन रही है। पॉश इलाके स्वरूपनगर और आर्यनगर में भी बड़े पैमाने पर ऐसे निर्माण हो रहे हैं।
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