आर्मी चीफ के बयान पर सियासत: कांग्रेस बोली- यह ज्यादती होगी

Updated on: 17 September, 2019 09:06 PM

नई दिल्ली
कश्मीर में आतंकियों के मददगारों को लेकर दिए गए आर्मी चीफ बिपिन रावत के बयान पर अब सियासत शरू हो गई है। कांग्रेस और बीजेपी इस मुद्दे को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने गुरुवार को कहा कि अगर सेना कश्मीर के बच्चों को पकड़ती है तो यह बहुत ज्यादती होगी। उधर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आजाद के बयान की आलोचना करते हुए कहा है कि सेना को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। इस बीच प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल नैशनल कान्फ्रेंस ने आर्मी चीफ की भाषा पर सवाल उठाए हैं।


बता दें कि आर्मी चीफ बिपिन रावत ने बुधवार को चेतावनी भरे लहजे में कहा था कि कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ सेना के ऑपरेशन्स में बाधा डालने वालों को आतंकवादियों का सहयोगी समझा जाएगा और उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उनका इशारा सुरक्षा बलों पर पथराव करने वाले लोगों की तरफ था। रावत के इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्यसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, 'पिछले साल 1000 बच्चों को स्प्लिन्टर्स लगे। 100-200 बच्चों की आंखें चली गईं। यह कहना कि हम कश्मीर के बच्चों को पकड़ लेंगे, इसे देश के लोग पसंद नहीं करेंगे।'


अपने गृह राज्य में मौजूदा हालात के लिए आजाद ने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, 'ये हालात केंद्र सरकार की नाकामी की वजह से है। इन्हें समझ नहीं आया कि J&K क्या है। हम भी सरकार चलाते थे, तब क्यों नहीं हुआ।'


कांग्रेस का बयान सामने आते ही बीजेपी ने पलटवार करने में देर नहीं लगाई। पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, 'क्या हम आर्मी और आर्मी चीफ को राजनीति से दूर रख सकते हैं? मैं कांग्रेस के बयान की आलोचना करता हूं।'


इस बीच प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल नैशनल कॉन्फ्रेंस ने भी कांग्रेस के सुर में सुर मिलाते हुए आर्मी चीफ के बयान की आलोचना की है। पार्टी नेता मुस्तफा कमल ने कहा, 'मैं हैरान हूं कि आर्मी के एक सीनियर अधिकारी इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस तरह की भाषा डींग हांकने वाले और गुंडे इस्तेमाल करते हैं।'

बता दें कि सेना प्रमुख के बयान के बाद गुरुवार को सीआरपीएफ का भी बयान आया है, जिसमें कहा गया है कि कश्मीर के कुछ हिस्सों में लोग आतंकवादियों के दबाव में आकर भागने में उनकी मदद करते हैं।

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