पाक को जवाब में गोलियां न गिनने को कहा गया थाः राजनाथ सिंह

Updated on: 21 September, 2019 06:59 AM

इंफाल
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को खुलासा किया कि पिछले साल सितंबर में नियंत्रण रेखा के पार सर्जिकल स्ट्राइक का निर्णय उड़ी में सेना के शिविर पर आतंकवादी हमले के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक आपात बैठक में किया गया था। राजनाथ ने यहां कहा, 'पिछले साल सितम्बर में जब खबर आई कि आतंकवादियों ने सेना के एक शिविर पर हमला करके 17 जवानों की हत्या कर दी है, एक आपात बैठक बुलाई गई जिसमें प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और मैंने अधिकारियों के साथ हिस्सा लिया और एक दृढ़ निर्णय किया गया कि एक लक्षित हमला किया जाएगा।'

भारत के विशेष बलों ने नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर स्थित सात आतंकवादी शिविरों पर 28 सितम्बर की रात में लक्षित हमला किया। सेना ने कहा कि हमले में 'बड़ी संख्या में' आतंकवादी और उनके सहयोगी मारे गए। लक्षित हमला कश्मीर के उड़ीमें सेना के शिविर पर आतंकवादी हमले के 11 दिन बाद किया गया था। सिंह ने कहा, 'लक्षित हमले के जरिए हमने विश्व को एक संदेश दिया कि हम कमजोर नहीं बल्कि एक मजबूत देश हैं।' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आतंकवाद से निपटने में कठोर हैं और लक्षित हमला इसकी पुष्टि करता है। सिंह ने याद किया कि 2014 में उन्होंने बीएसएफ से स्वयं कहा था कि सीमापार से पाकिस्तान की गोलीबारी का जवाब देते समय 'गोलियां नहीं गिने।'

उन्होंने कहा, 'सितम्बर 2014 में मुझे पता चला कि नियंत्रण रेखा के पार से हुई गोलीबारी में पांच व्यक्तियों की मृत्यु हो गई है। मैंने तत्काल बीएसएफ के महानिदेशक को यह पूछने के लिए फोन किया कि बीएसएफ क्या कर रही है। उन्होंने कहा कि बीएसएफ ने यह संकेत देने के लिए 16 बार सफेद झंडा दिखाया है कि वह बात करना चाहती है। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से कोई जवाब नहीं आया।

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