कंप्यूटर से तैयार किए गए थे जाली नोट: NIA

Updated on: 20 July, 2019 03:08 AM

नई दिल्ली
नैशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने हाल में जब्त किए गए नए 2,000 रुपये के करेंसी नोट की डिटेल्ड फरेंसिक अनैलेसिस की है। इसमें यह बात सामने आई है कि ये लो क्वॉलिटी वाले जाली नोट थे, जिन्हें ‘कंप्यूटर मैनिप्युलेटेड प्रिंट्स’ और ‘कलर कॉपी’ के जरिए जेनरेट किया गया है। यह नतीजा शुरुआती चेतावनी के ठीक उलट है, जिससे इस बात की कयासबाजी होने लगी थी कि नोटों में ज्यादातर सिक्योरिटी फीचर्स के साथ समझौता किया गया है। NIA ने इन नोटों को पश्चिम बंगाल के मालदा से एक जाने-माने कुरियर से जब्त किया था।

इकनॉमिक टाइम्स ने NIA की फरेंसिक रिपोर्ट का आकलन किया है। रिपोर्ट में इन नोटों को जाली बताया गया है लेकिन इनको हाई क्वॉलिटी के तौर पर कैटिगराइज्ड नहीं किया गया है। NIA जैसी जांच एजेंसियां आमतौर पर हाई-क्वॉलिटी वाले जाली नोटों के मामलों पर फोकस करती हैं, क्योंकि यह जटिल प्रिंटिंग कैपेबिलिटी के साथ एक संगठित सिंडिकेट की ओर इशारा करती हैं।

फरेंसिक अनैलेसिस में पाया गया है कि 2,000 रुपये के नए नोट के 17 फीचर्स में से नोट की लंबाई और चौड़ाई बिलकुल ठीक थी। इसके अलावा, फाइनल रिपोर्ट में कहा गया है कि मेन (मुख्य) और हिडन (छिपे हुए) वॉटरमार्क्स के अलावा इलेक्ट्रोटाइप वॉटरमार्क की नकल की गई है। ऑफिसर्स ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि यह प्रतीकात्मक कंप्यूटर स्कैन और मैनिप्युलेशन है।

इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब्त किए गए नोट मोटे पेपर पर थे और इसमें ‘प्रजातंत्री बांग्लादेश’ का पेपरमार्क है, जो कि बांग्लादेश सरकार के स्टाम्प पेपर के इस्तेमाल की ओर इशारा करता है। एजेंसी की फरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक फर्जी नोट को ऑरिजनल नोट से अलग करने वाले अपफ्रंट फीचर्स में साफतौर पर बहुत असमानता थी। फर्जी नोट में अलग टेक्सचर, डिनॉमिनेशन न्यूमेरल्स न होने के अलावा नोट पर प्रिंटेड डिजाइन के साइज में काफी अंतर था। इसके अलावा, फर्जी नोटों में ऑप्टिकल रिस्पॉन्स फीचर्स नहीं थे। ऑप्टिकल रिस्पॉन्स फीचर्स लाइट में ऑरिजनल नोट को पहचानने में मदद करते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पेपर ‘ऑप्टिकली इनऐक्टिव’ था। साथ ही फ्लोरसंट फाइबर के अलावा टिंट बैंड भी जाली नोटों में नहीं था। जाली नोटों की नंबरिंग भी फ्लोरसंट नहीं थी। NIA की रिपोर्ट के मुताबिक जाली नोटों में सिक्यॉरिटी थ्रेड आंशिक रूप से मौजूद था। हालांकि, यह रिवर्स साइड में नहीं था। रिपोर्ट में कहा गया है कि जाली नोटों का कलर शेड भी ऑरिजनरल से मेल नहीं खाता है।

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