बिल्डरों से उठता जा रहा है मुंबईकरों का भरोसा?

Updated on: 17 July, 2019 12:37 AM

मुंबई
प्रॉपर्टी के नाम पर आए दिन बढ़ रहे धोखाधड़ी के मामलों की वजह से मुंबईकरों का बिल्डरों पर से विश्वास कम होता जा रहा है। यही वजह है कि मुंबईकरों ने बिल्डरों के प्लान और मंजूरियों के बारे में जानने के लिए सबसे अधिक आरटीआई फाइल की है। यह बात ऑनलाइन आरटीआई फाइल करवाने वाली वेब साइट 'ऑनलाइन आरटीआई डॉटकॉम' के जरिए सामने आई है।

वेबसाइट से मिले आंकड़ों के अनुसार पिछले 3 सालों में मुंबईकरों द्वारा अलग-अगल जानकारियों के लिए 7400 आरटीआई फाइल की गईं हैं, जिनमें से 722 केवल प्रॉपर्टी से संबंधित हैं। प्रॉपर्टी के कागजों को लेकर लोगों के मन में अक्सर भ्रम रहता है। बिल्डर द्वारा दिए जाने वाले दस्तावेज असली हैं या नहीं, इसकी पहचान करना घर खरीदने वालों के लिए थोड़ा मुश्किल काम होता है। इसलिए लोग इसकी जांच पड़ताल में लगे रहते हैं और अधिक से अधिक आरटीआई फाइल करते हैं।

पिछले कुछ सालों में प्रॉपर्टी में व्याप्त फर्जीवाड़े का खुलासा होने से मुंबईकरों का बिल्डरों से विश्वास कम होने लगा है। इसलिए घर खरीदने से पहले हर मुंबईकर पूरे प्रॉजेक्ट के बारे में जान लेना चाहता है। जैसे कि जमीन किसकी है, नॉन एग्रीकल्चरल है या फॉरेस्ट लैंड है, इमारत को कितनी एफएसआई दी गई है? साथ ही इमारत को ओसी दी गई है या नहीं, इससे संबंधित जानकारी के लिए मुंबईकरों ने बीएमसी के अलग-अलग विभागों में 722 आरटीआई फाइल की है।

दाखिल की गई आरटीआई में सबसे अधिक जानकारी बीएमसी द्वारा प्रॉजेक्ट के लिए दी गई मंजूरियों के बारे में है। इसके अलावा प्रॉजेक्ट पर कानूनी मामला दर्ज है या नहीं, इसके बारे में भी पूछा गया है। कई आरटीआई के तहत कर बकाया होने के बारे में भी जानकारी मांगी गई है।

ऑनलाइन आरटीआई डॉट कॉम के फाउंडर प्रदीप खन्ना के मुताबिक, मुंबई से तकरीबन हर महीने 200 आरटीआई हमारे वेब साइट के जरिए फाइल की जाती है। इसमें अधिकतर आरटीआई प्रॉपर्टी से संबंधित होते हैं। इस संबंध में महाराष्ट्र वेलफेयर सोसायटी फेडरेशन के चेयरमैन रमेश प्रभु ने बताया कि यह इसलिए हुआ है क्योंकि हमारे पास जानकारी हासिल करने का और कोई जरिया नहीं है। यदि प्रशासन प्लान से संबंधित मंजूरियों को ऑनलाइन उपलब्ध करा दे तो आम लोगों की समस्या समाप्त की जा सकती है।

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