बिल्डर की मनमानी की शिकायत उडा से करें

Updated on: 19 August, 2019 01:29 AM

उत्तराखंड में सोमवार एक मई से रियल एस्टेट एक्ट प्रभावी हो गया है। एक्ट के तहत लोगों की बिल्डर के खिलाफ शिकायत सुनने के लिए राज्य स्तर का रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण का गठन होना है। फिलहाल इस प्राधिकरण का गठन न होने तक शासन ने उत्तराखंड आवास एंव नगर विकास प्राधिकरण (उडा) को यह जिम्मेदारी सौंपी है।

रियल एस्टेट क्षेत्र में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में सोमवार एक मई से रियल एस्टेट एक्ट प्रभावी कर दिया है। इस बीच उत्तराखंड सरकार ने एक्ट को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए नियमावली जारी कर दी है। इसके तहत बिल्डर से परेशान ग्राहक राज्य स्तर पर बनने वाले रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण में शिकायत करेंगे। इस प्राधिकरण में अध्यक्ष समेत तीन सदस्य होंगे, जिसके अध्यक्ष मुख्य सचिव स्तर के सेवानिवृत्त अधिकारी होंगे, जबकि सदस्य के रूप में जिला जज स्तर के रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी होंगे। यदि प्राधिकरण के फैसले से कोई पक्ष संतुष्ट नही है तो वो फिर रियल एस्टेट ट्रिब्यूनल में वाद दायर कर सकेगा। जहां 60 दिन में वाद का निपटारा किया जाना अनिवार्य किया गया है। इस प्राधिकरण में भी न्यायिक सेवा और प्रशासनिक सेवा के रिटायर्ड अधिकारी शामिल होंगे। इस बीच शासन ने राज्य स्तरीय नियामक प्राधिकरण बनने में लगने वाली देरी को देखते हुए उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण को यह काम दे दिया है। परेशान ग्राहक फिलहाल उड़ा में बिल्डर की शिकायत कर सकते हैं। उडा के फिलहाल देहरादून और रुद्रपुर में दो कार्यालय संचालित हो रहे हैं। साथ ही रियल एस्टेट ट्रिब्यूनल के गठन में भी देरी को देखते हुए, राज्य में एक्टिव दूसरे ट्रिब्यूनल को यह काम दिए जाने की तैयारी है। इसके लिए शासन ने न्याय विभाग से राय मांगी है।

रियल एस्टेट में अब ग्राहक की चलेगी

रियल एस्टेट सेक्टर के विस्तार के बावजूद अब तक इस क्षेत्र को कंट्रोल करने के लिए देश में कोई प्रभावी कानून नहीं था। इस कारण ग्राहम फ्लैट की खरीद या प्री बुकिंग के बाद से ही बिल्डर के रहमो करम पर निर्भर रहता था। बने बनाए फ्लैट खरीदेन वाले जहां फ्लैट की गुणवत्ता और ऑफ्टर सेल सर्विस को लेकर बिल्डर से तंग रहते थे, वहीं एडवांस बुकिंग करने वालों को तय समय पर मासिक प्रीमियम देने के बावजूद अक्सर समय पर फ्लैट नहीं मिल पाता था। साथ ही बुकिंग के समय बताई गई खूबियों के विपरीत निर्माण किया जाता था। ऐसे मामले अब तक सामान्य उपभोक्ता फोरम में ही जाते थे, जहां अधिक से अधिक बिल्डर पर मामूली जुर्माना ही लग पाता था। कई बार उपभोक्ता फोरम के आदेश के बावजूद भी बिल्डर से असल जुर्माना वसूलने में ग्राहक के पसीने छूट जाते थे। अब प्रभावी एक्ट आने से बिल्डर की ऐसी मनमानियों पर रोक लग सकेगी।

खास बातें

पांच सौ वर्ग मीटर और आठ अपार्टमेंट से अधिक की सभी परियोजनाओं का नियामक प्राधिकरण में पंजीकरण अनिवार्य किया

ग्राहक से वसूली गई 70 फीसदी धनराशि को अगल बैंक में रखा जाएगा, इसका इस्तेमाल सिर्फ निर्माण कार्य में ही होगा

प्राधिकरण में रजिस्ट्रेशन के समय बिल्डर को प्रोजेक्ट ले आउट, स्वीकृति, ठेकेदार, प्रोजेक्ट शुरू करने और पूरा करने की समय सीमा के साथ ही खरीददारों का पूरा विवरण देना होगा

यदि बिल्डर तय समस सीमा के अंदर निर्माण पूरा नहीं कर पाता है तो उसे ग्राहक को चुकाई गई रकम पर ब्याज चुकाना होगा, ब्याज की गणना बिल्डर द्वारा ग्राहक से भुगतान में हुई देरी के बदले वसूले जाने वाले जुर्माना की दर से होगी

प्राधिकरण के आदेश की अवहेलना करने पर बिल्डर को अधिकतम तीन वर्ष की सजा हो सकती है, साथ ही प्राधिकरण ग्राहक के हुए नुकसान को आंकते हुए जुर्माना भी लगा सकता है

प्राधिकरण में सभी रियल एस्टेट एजेंट को भी पंजीकरण करवाना होगा। इसके लिए उन्हें 25 हजार की फीस चुकानी होगी। एजेंट को वायदा पूरा न निभाने पर एक साल की सजा हो सकती है

प्राधिकरण झूठे शिकायत करने वाले ग्राहक को भी एक साल की सजा दे सकता है। ग्राहक को सभी सबूत मय शपथपत्र देने होंगे

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