कुलभूषण मामला: पढ़ें, जाधव के अपहरण से लेकर फांसी पर रोक तक की पूरी कहानी

Updated on: 16 October, 2019 06:09 AM





कथित जासूसी के आरोप में पाकिस्तान द्वारा ईरान से अपहरण किए गए भारतीय नौसेना के रिटायर्ड अफसर कुलभूषण जाधव की फांसी की सजा पर रोक लग गई है। पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने जाधव को 11 अप्रैल को फांसी की सजा सुनाई थी।

जानें, कुलभूषण के अपहरण होने से लेकर अब तक क्या-क्या हुआ-

3 मार्च 2016 को पाकिस्तान ने जाधव को बलूचिस्तान इलाके से गिरफ्तार करने का दावा किया।

25 मार्च 2016 को इस बारे में भारत को जानकारी दी

25 मार्च 2016 को ही भारत सरकार ने कुलभूषण जाधव को काउंसलर एक्सेस देने की मांग की।

30 मार्च को भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के कुलभूषण जाधव को प्रताड़ित करने की बात कही। भारत सरकार ने जाधव को ईरान से अगवा करने आशंका जताई।

23 जनवरी 2017 को पाकिस्तान ने भारत से मामले की जांच में मदद के लिए पत्र लिखा लेकिन काउंसलर एक्सेस नहीं दिया।

25 मार्च 2016 से 31 मार्च 2017 तक भारत सरकार ने 13वीं बार जाधव को काउंसलर एक्सेस देने की मांग की।

11 अप्रैल को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जासूसी का आरोप लगाकर जाधव को फांसी की सजा सुनाई थी।

12 अप्रैल को भारतीय संसद में गूंजा मामला।

14 अप्रैल को भारत सरकार ने 14वीं बार पाकिस्तान से काउंसलर एक्सेस की मांग की।

8 मई 2017 भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में वियना संधि को ध्यान रखते हुए जाधव की फांसी पर रोक लगाने के लिए आवेदन दिया।

9 मई को अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट ने फांसी पर रोक लगाई।

नीदरलैंड स्थिति अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट के कानून के अनुच्छेद 74 के पैरा 4 नियम के आधार पर फैसला दिया गया। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस बारे में जाधव की मां को जानकारी दी।


अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तान में कैद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की फांसी की सजा पर रोक लगा दी है। भारत ने कोर्ट में पाक के खिलाफ तीन दलीलें दीं। 

— भारत ने अपनी अपील में पाकिस्तान पर वियना समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया था।

— कुलभूषण जाधव को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया।

— भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को जाधव से मिलने की अनुमति नहीं दी गई।

1961 में हुए वियना समझौेते के तहत स्वतंत्र देशों के बीच राजनयिक संबंधों के लिए एक नई रुपरेखा तय की गई थी।

भारत ने कोर्ट में कहा कि जाधव का ईरान से अपहरण किया गया, जहां वह सेना से रिटायर होने के बाद व्यापारिक गतिविधियों में व्यस्त थे। उनकी गिरफ्तारी के काफी समय बाद तक पाक ने कोई सूचना नहीं दी। इतना ही नहीं, पाक आरोपी के मानवाधिकारों की रक्षा करने में असफल रहा है।

भारत की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि पाकिस्तान इस मामले में उसका अंतिम फैसला आने तक कोई कदम न उठाए। उसने पाक सरकार से जाधव के मानवाधिकारों का सम्मान करने को कहा है। इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को एक पत्र भी भेजा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 15 मई को होनी है। 

गौरतलब है ​कि पाकिस्तान सेना की अदालत ने इस साल 10 अप्रैल को जासूसी और आतंकवाद का आरोप लगाते हुए जाधव को फांसी की सजा सुनाई थी। इस पर भारत ने उसे आगाह किया था कि बिना किसी सुनवाई या बचाव का मौका दिए जाधव को फांसी की सजा देना सोची समझी हत्या जैसा होगा।

सैन्य अदालत ने जाधव को सजा के खिलाफ अपील के लिए 60 दिन का मौका दिया था। भारत ने जाधव की ओर से अपील दायर करने और उससे संपर्क की मांग पाकिस्तान के समक्ष रखी, लेकिन पाकिस्तान ने इसे ठुकरा दिया था। उसका कहना है कि किसी जासूस को राजनियक संपर्क की इजाजत नहीं दी जा सकती।

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