आतंकियों की बर्बरता: शहीद फैयाज की हत्या से पहले किया बुरी तरह प्रताड़ित

Updated on: 22 August, 2019 04:55 AM

आतंकियों ने सेना के लेफ्टिनेंट 23 वर्षीय फैयाज की हत्या से पहले उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित किया था। मीडिया में आई रिपोर्ट्स उनके जबड़ा-घुटने तोड़ दिए थे और दांत भी निकाल लिए थे। आपको बता दें कि मंगलवार को उनका आतंकियों ने अपहरण कर हत्या कर दी थी। सेना मे डॉक्टर रहे फयाज के शरीर में बुलेट के दो निशान मिले हैं। एक जबड़े में और एक पेट में। फैयाज के शरीर में घाव के कई निशान मिले हैं।

दु्ल्हन के साथ थे तब आतंकियों ने किया अगवा

सेना में तैनाती के बाद पहली बार लेफ्टिनेंट उमर फैयाज छुट्टी पर घर आए थे, वो अपनी बहन की शादी में शिरकत करने आए थे और जिस वक्त उन्हें आतंकवादी ले गए वो दुल्हन के साथ बैठे थे। वो 25 मई को अखनूर अपनी यूनिट में लौटने वाले थे। मंगलवार रात 10 बजे 3 हथियारबंद आतंकियों ने उन्हें सबके सामने से अगवा कर लिया। सुबह 6.30 बजे 3 किमी दूर हरमेन गांव में बीच चौराहे पर उनका शव मिला।

परिवार ने बताया कि फैयाज का जन्म 8 जून 1994 को हुआ था और उन्होंने दक्षिण कश्मीर के अशमुकाम में मौजूद नवोदय विद्यालय से स्कूली पढ़ाई की थी और दिसंबर 2016 में कमीशन मिलने के बाद सेना में शामिल हुए थे। वह प्रतिष्ठित पुणे स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) के 129वें बैच के कैडेट थे। वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सेना में भर्ती होने के बाद फयाज ने पहली बार छुट्टी ली थी। उन्हें 25 मई को जम्मू के अखनूर स्थित यूनिट को ज्वॉइन करना था।

पिछले चार साल में ट्रेनिंग के दौरान उमर 12 बार घर आए। उन्होंने कभी भी सैनिकों को टिकट पर मिलने वाली छूट का फायदा नहीं लिया। बल्कि पूरे पैसे देकर टिकट ली। फैयाज वॉलीबॉल और हॉकी के अच्छे खिलाड़ी थे। ट्रेनिंग के दौरान एनडीए की हॉकी टीम के भी कप्तान रहे थे। नवोदय स्कूल में पढ़ाई के दौरान सेना में जाने के लिए इंस्पायर हुए।

आपको बता दें कि कश्मीर में 26 साल में यह पहला मौका है, जब किसी फौजी अफसर को अगवा कर उसकी हत्या की गई। 1991 में बडगाम में ले. कर्नल जीएस बाली और उनके भतीजे को एक शवयात्रा से अगवा कर मार डाला था।
सेना में पिछले साल दिसंबर में भर्ती हुए 23 वर्षीय लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की पहली छुट्टी ही उनकी आखिरी छुट्टी साबित हुई। जिस रिश्तेदार की शादी में खुशी का इजहार करने पहुंचे थे उन्हीं बारातियों को उनके जनाजे में आना पड़ा। उनके जनाजे में शामिल होने वाले रिश्तेदारों को अब भी भरोसा नहीं हो रहा है कि फैयाज अब इस दुनिया में नहीं है।

अधिकारियों ने बताया कि सेना के 2 राजपूताना राइफल्स में तैनात फैयाज छुट्टी लेकर ममेरी बहन की शादी में कुलगाम गए थे। लेकिन आतंकियों ने मंगलवार की रात अपहरण कर फयाज की हत्या कर दी और उनका शव घर से करीब तीन किलोमीटर दूर मिला, जिसपर गोलियों के निशान थे।

परिवार ने बताया कि फैयाज का जन्म 8 जून 1994 को हुआ था और उन्होंने दक्षिण कश्मीर के अशमुकाम में मौजूद नवोदय विद्यालय से स्कूली पढ़ाई की थी और दिसंबर 2016 में कमीशन मिलने के बाद सेना में शामिल हुए थे। वह प्रतिष्ठित पुणे स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) के 129वें बैच के कैडेट थे। वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सेना में भर्ती होने के बाद फयाज ने पहली बार छुट्टी ली थी। उन्हें 25 मई को जम्मू के अखनूर स्थित यूनिट को ज्वॉइन करना था।

आखिरी दम तक लड़े

लेफ्टिनेंट फैयाज के पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक उनके शरीर पर कई निशान है, जो संकेत करता है कि उन्होंने आतंकियों से पूरी बहादुरी से मुकाबला किया। रिपोर्ट के मुताबिक आतंकियों ने करीब से फयाज के सिर, पेट और छाती में गोली मारी।

दो नाकबपोश ले गए थे साथ

स्थानीय लोगों ने बताया कि मंगलवार रात करीत दस बजे दो नकाबपोश आए थे और निहत्थे फैयाज को साथ आने को कहा। इसके साथ ही परिवार को धमकी दी थी कि अपहरण की जानकारी पुलिस को नहीं दें।

स्थानीय लोगों में गुस्सा

लेफ्टिनेंट फैयाज की हत्या को लेकर पूरे इलाके में गुस्से का माहौल है। स्थानीय लोगों ने पुलिस और सेना से मांग की है कि वह दोषियों की पहचान कर उन्हें सजा दिलाए।

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