मायावती के पास 3, नसीमुद्दीन के पास 2 ऑप्शन: दोनों नेताओं के भव‍िष्य पर एक्सपर्ट्स

Updated on: 20 October, 2019 05:49 PM

लखनऊ. बसपा से निकाले गए नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मायावती के साथ बातचीत के 6 ऑडियो टेप रिलीज किए हैं। उनका आरोप है कि मायावती ने मुसलमानों के लिए अपशब्द कहे और उनसे 50 करोड़ रुपए की मांग की। वहीं, सिद्दीकी के आरोपों पर मायावती ने पलटवार करते हुए उन्ह‍ें पैसा उगाहने वाला, टेपिंग ब्लैकमेलर और बसपा की हार के लिए जिम्मेदार बताया। इन आरोपों के बाद DainikBhaskar.com ने पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स रतनमणि लाल, ब्रजेश शुक्ला, असलम खान से बातचीत की। उन्होंने बताया कि अब मायावती के साथ-साथ नसीमुद्दीन के पास भविष्य में क्या-क्या ऑप्शन हो सकते हैं।
#मायावती के पास क्या है ऑप्शन?
1. मुसलमान नेता को लेकर आएं
- मायावती के पास अब एक ही रास्ता है कि वह नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पुख्ता सबूतों के साथ झूठा साबित कर दें। इससे उनका वोटर उन पर विश्वास कर लेगा। हालांकि, जो टेप सिद्दीकी ने रिलीज किए हैं, उससे ऐसा होना मुश्किल दिख रहा है।
- मायावती जल्द ही किसी दूसरे मुस्लिम नेता को महत्वपूर्ण पद पर लेकर आएं, क्योंकि नसीमुद्दीन ने उन पर मुसलमानों को अपशब्द कहने का आरोप लगाया है। सिद्दीकी से पहले भी जो नेता पार्टी से निकले हैं, वे मायावती पर करप्शन के आरोप लगा चुके हैं।
- मायावती जानती हैं कि करप्शन के आरोप साबित नहीं होंगे, लेकिन यूपी में कास्ट इक्वेशन टूटा तो उसे बनाना मुश्किल होगा।
2. जीते हुए विधायकों को रोकना
- मायावती के पास सेकेंड ऑप्शन है कि जो 19 विधायक जीते हैं, उन्हें वे अपने पाले में रोककर रखें और उन्हें विश्वास दिलाएं कि अभी भी कुछ बिगड़ा नहीं है। इसकी वजह है कि जिस तरह से एक वर्तमान एमएलसी ब्रजेश सिंह अब नसीमुद्दीन के साथ आ गए हैं, उसे विधायकों की टूट के तौर पर देखा जा रहा है।
3. अगला चुनाव कांग्रेस के साथ अलायंस में लड़े बसपा
- अगर मायावती को बड़ी पारी खेलनी है तो वह अगला लोकसभा चुनाव कांग्रेस के साथ अलायंस में लड़े। हालांकि, ये काफी आगे की बात है, क्योंकि बसपा के पास अब न तो कैडर वोट है और जो बचे हुए मुस्लिम वोट थे, उनमें भी नाराजगी होगी।
#नसीमुद्दीन सिद्दीकी के पास क्या है ऑप्शन?
1. नई पार्टी बना सकते हैं
- नसीमुद्दीन सिद्दीकी को अभी एक एमएलसी का सपोर्ट मिला है, जबकि कई विधायक उनके टच में होंगे। अगर विधायक टूटते हैं तो वह नई पार्टी का गठन कर सकते हैं।
- ऐसे में जहां बसपा से लोग टूटकर आएंगे वहीं सपा और कांग्रेस से भी लोग टूटेंगे, क्योंकि इस समय मुसलमानों के पास कोई बेहतर ऑप्शन नहीं दिख रहा है। जबकि नसीमुद्दीन खुद बड़े और कद्दावर मुस्लिम नेता हैं।
2. कांग्रेस में जा सकते हैं
- अगर नसीमुद्दीन को अपनी राजनीति को बतौर मुस्लिम नेता आगे बढ़ाना है तो उनके लिए कांग्रेस बेहतर ऑप्शन हो सकती है। वजह है कि नसीमुद्दीन एक मुस्लिम नेता के तौर पर प्रतिष्ठित हो चुके हैं। इसका फायदा उन्हें कांग्रेस में मिल सकता है, जबकि सपा में आजम खान के सामने यूपी में सिद्दीकी उस लेवल तक शायद नहीं उभर पाएंगे।
एक्सपर्ट्स की मानें तो नसीमुद्दीन नई पार्टी बना सकते हैं।

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