जीप कांडः युवक को जीप में बांध घुमाने वाले मेजर गोगोई बोले, ऐसा नहीं करता तो जाती कई जानें

Updated on: 22 August, 2019 04:59 AM

कश्मीर में पत्थरबाजों से निपटने के लिए एक युवक को जीप के बोनट से बांधकर मानव ढाल की तरह इस्तेमाल करने वाले मेजर लिथुल गोगोई पहली बार मीडिया के सामने आए। गोगोई ने उस घटना के बारे में विस्तार से बताया। गोगोई ने कहा कि अगर उस दिन उस युवक को जीप से बांधने वाली योजना पर काम नहीं किया होता तो कई लोगों की जानें जातीं। मालूम हो, राष्ट्रीय राइफल्स के मेजर लिथुल गोगोई को आर्मी चीफ की ओर से आतंकवाद निरोधी कार्रवाई के लिए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया है। दूसरी ओर, कश्मीर में पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है।

मेजर गोगोई के मुताबिक, 9 अप्रैल को सुबह साढ़े 10 बजे कॉल आया था कि गुंडीपुरा में 1200 लोगों ने मतदान केंद्र को घेर रखा है और उसे पेट्रोल बम से जलाने की कोशिश कर रहे हैं। हम मतदान केंद्र से करीब डेढ़ किमी दूर थे। जब हम क्विक रिस्पॉन्स टीम के साथ वहां पहुंचे तो देखा कि महिला और बच्चे भी पत्थरबाजी में शामिल थे। कुछ लोग मकानों की छत से सेना की टीम पर पथराव कर रहे थे।

भीड़ ने हमारे काफिले पर भी पथराव शुरू कर दिया। मैंने देखा कि फारूख अहमद डार नामक युवक पत्थरबाजों को उकसा रहा है और उसी के इशारे पर ये पत्थरबाजी हो रही है। हमने उसका पीछा किया तो वह भागने लगा। लेकिन टीम किसी तरह उसे पकड़ने में कामयाब रही। जब हमने उस युवक को पकड़ा तो पत्थरबाजी बंद हो गई। यहीं से विचार सूझा कि भीड़ से सुरक्षित बाहर निकलना है और कोई बलप्रयोग भी नहीं करना है तो उस युवक को ही ढाल बनाना होगा।

उसे सेना की जीप के आगे बांधकर हम तत्काल अपनी टीम के साथ मतदान केंद्र पहुंचे और वहां चार पोलिंग स्टॉफ, आईटीबीपी के जवान और एक कश्मीर पुलिस के जवान की जान बचाई। अगर हम ऐसा नहीं करते और फायरिंग का रास्ता अपनाते तो कई जानें जातीं।

उधर, पीड़ित युवक डार इस घटना को अंजाम देने वाले मेजर को सेना की ओर सम्मानित किए जाने से आहत है। उसका सवाल है कि क्या किसी व्यक्ति को करीब 28 किलोमीटर तक बांध कर ले जाना बहादुरी है? डार के मुताबिक उसे अभी तक न तो पुलिस और न ही सेना ने बुलाया है। उसने कहा- जांच तो ढकोसला है। वे कभी गंभीर नहीं रहे। मैं तो छोटा आदमी हूं, कोई मेरी फिक्र क्यों करे?
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पुलिसमेजर को सेना द्वारा सम्मानित किए जाने के बाबजूद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि इस मामले में जांच जारी रहेगी। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि किन परिस्थितियों में वह घटना घटी।कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) मुनीर खान ने सोपोर में पत्रकारों को बताया कि एफआईआर खारिज नहीं की गई है। उन्होंने कहा- "जांच होगी और उसके परिणाम साझा किए जाएंगे। एक बार एफआईआर दर्ज होने पर जांच पूरी की जाती है। एफआईआर का मतलब जांच शुरू होना है।" मालूम हो, इस घटना का वीडियो सार्वजनिक होते ही लोगों में आक्रोश पैदा होने पर पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की और सेना ने कोर्ट ऑफ इक्वान्यरी का आदेश दिया।

इस बीच, मेजर गोगोई के सम्मान पर कई राजनीतिक दलों ने ऐतराज जताया है। जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले सरकार को ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए था। इससे कश्मीर की स्थिति और बिगड़ेगी। यादव ने कहा- "कश्मीर में स्थिति विकट है। कोई भी कदम जांच के नतीजों के आधार पर उठाना चाहिए।" वहीं, भाकपा के वरिष्ठ नेता डी. राजा ने हालांकि गोगोई के सम्मान पर तो कुछ नहीं बोला, लेकिन कश्मीर के बहाने उन्होंने केंद्र पर निशाना साधा। राजा ने कहा- "सेना प्रमुख ने जो किया वह सेना का मसला है। इस पर मुझे कुछ नहीं कहना है। कश्मीर में स्थिति हर रोज बिगड़ रही है। बच्चे भी प्रदर्शन में शामिल हो गए हैं। केंद्र को राज्य की जनता का विश्वास जीतने के लिए कदम उठाने चाहिए। कश्मीर की समस्या का समाधान राजनीतिक स्तर पर करने की जरूरत है।"
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