पेरिस समझौता: अमेरिका के बाहर जाने से क्या होगा असर, जानें

Updated on: 16 October, 2019 06:20 AM

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐतिहासिक पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकलने की घोषणा कर दी है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में कहा, हम पेरिस समझौते से बाहर निकल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेरिस समझौता अमेरिका पर कठोर वित्तीय एवं आर्थिक बोझ है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके नागरिकों की रक्षा करना मेरा परम कर्तव्य है इसलिए अमेरिका पेरिस समझौता से बाहर निकलन जाएगा। हम इससे हट रहे हैं और फिर से बातचीत शुरू करेंगे। ट्रंप ने कहा कि वह चाहते हैं कि जलवायु परिवर्तन को लेकर पेरिस समझौते में अमेरिकी हितों के लिए एक उचित समझौता हो।

क्या है पेरिस जलवायु समझौता
साल 2015 में लगभग 200 देशों के बीच पेरिस जलवायु समझौता हुआ था। इन देशों ने अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने का फैसला किया था। इसके तहत ग्लोबलवॉर्मिंग को दो डिग्री सेल्सियस तक नीचे लाने का लक्ष्य रखा था जिसे बाद में 1.5 डिग्री सेल्सियस तक ले जाने का प्रयास है। इस समझौते के तहत ग्रीन हाउस गैसेस के उत्सर्जन में 28 फीसदी की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सितंबर 2016 में इस समझौते पर हस्ताक्षर किया था। इस फैसले के तहत अमेरिका को गरीब देशों को तीन बिलियन डॉलर सहायता राशि देने पर सहमति बनी थी। 4 नवंबर 2016 से यह समझौता लागू भी हो गया था।

इस समझौते से अमेरिका के बाहर होने का मतलब
अमेरिका सबसे बड़ा कार्बन उत्सर्जक देश है। दुनिया के कार्बन उत्सर्जन का करीब 15 फीसदी हिस्सा अमेरिका से आता है। अगर अमेरिका इससे बाहर होता है तो दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन कम करने की कोशिशों को झटका लगेगा। इतना ही नहीं अमेरिका के बाहर होने से गरीब देशों केा मिलने वाली रकम पर भी असमंजस है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पेरिस समझौते के बारे में कहा था कि इसमें सबकी जीत है और अमेरिका ये नई टेक्नोलॉजी और नए शोध में पैसा लगाकर लाखों नौकरियां पैदा करने का मौका है।

किस देश का क्या है रुख?
- भारत इस समझौते पर अमल करता रहेगा भले ही अमेरिका इससे अलग हो जाए।
- चीन का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से बचाव वैश्विक ज़िम्मेदारी है।
- रूस का कहना है कि अमेरिका के हाथ खींचने से पेरिस डील का प्रभाव घटेगा।
- ब्रिटेन ने कहा, अमेरिका से कार्बन उत्सर्जन को कम करने की अपील करेगा। स्वच्छ ऊर्जा के लिए यूरोपियन यूनियन प्रतिबद्ध है।

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