शिकंजा: SIT ने जांच में पाया गायत्री प्रजापति को गैंगरेप का आरोपी

Updated on: 19 June, 2019 07:21 PM

गैंगरेप के आरोपी पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति व उनके गुर्गों को लखनऊ पुलिस ने भले ही बचाने की कोशिश की हो लेकिन एसआईटी ने अपनी जांच में गायत्री को दोषी पाया है। मामले की जांच के लिए गठित स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (SIT) ने पाया कि गायत्री द्वारा पीड़िता को कई बार कॉल की गई और मैसेज भेजे गए। जबकि गायत्री की पत्नी ने अपने बयान में कहा था कि गायत्री को मोबाइल इस्तेमाल करना ही नहीं आता है। कॉल डिटेल और पीड़िता के बयान को आधार बनाते हुए एसआईटी ने गायत्री के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है।

18 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गायत्री प्रजापति और उसके गुर्गों के खिलाफ गौतमपल्ली थाने में गैंगरेप, रेप की कोशिश, पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। चित्रकूट की रहने वाली पीड़िता का आरोप था कि मौरंग का पट्टा दिलाने के नाम पर गायत्री व उसके गुर्गों ने उसके साथ गैंगरेप किया।

वहीं, उसकी नाबालिग बेटी से भी रेप की कोशिश की। इस मामले की विवेचना पहले सीओ अमिता सिंह फिर सीओ अवनीश मिश्रा को दी गई थी। पर, लापरवाही के आरोप में उनसे यह जांच ले ली गई थी। एसएसपी दीपक कुमार ने गायत्री के खिलाफ दर्ज मुकदमों की विवेचना के लिए सीओ चौक राधेश्याम राय की अगुवाई में एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम) गठित की थी।

एसआईटी का नेतृत्व कर रहे सीओ राधेश्याम राय ने बताया कि पीड़िता ने अपने बयान में कहा था कि उसके साथ गायत्री के मंत्री आवास, विधायक आवास और अशोक मार्ग स्थित होटल रामकृष्ण में दरिंदगी हुई थी। एसआईटी की जांच में तीनों ही जगह बताए गए दिन और वक्त पर पीड़िता के मौजूद होने की पुष्टि भी हुई। सीओ ने बताया कि कॉल डिटेल, पीड़िता के कलमबंद बयान और एक गवाह के बयान के आधार पर गायत्री प्रजापति, विकास वर्मा, पिंटू सिंह समेत सात अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट लगाई गई है।

यह है मामला

18 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गायत्री प्रजापति और उसके गुर्गों के खिलाफ गौतमपल्ली थाने में गैंगरेप, रेप की कोशिश, पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। पीड़िता का आरोप था कि मौरंग का पट्टा दिलाने के नाम पर गायत्री व उसके गुर्गों ने उसके साथ गैंगरेप किया। वहीं, उसकी नाबालिग बेटी से भी रेप की कोशिश की।
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मामले की विवेचना तत्कालीन सीओ आलमबाग अमिता सिंह को सौंपी गई थी। दो महीने की जांच में पीड़िता ने सीओ पर उसे धमकाने और बयान बदलने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं पीड़िता ने सीओ अमिता सिंह के खिलाफ उसकी बेटी को अगवा करने की रिपोर्ट चित्रकूट कोतवाली में दर्ज कराई थी।

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