रोजेदार अफसर ने ऐसे नाकाम किया हमला, जवानों को जिंदा जलाने आए थे आतंकी

Updated on: 19 November, 2019 05:27 PM

श्रीनगर.नॉर्थ कश्मीर के सुम्बल में सीआरपीएफ कैम्प पर हमले की कोशिश को नाकाम करने में रोजेदार कमांडेंट इकबाल अहमद और दो कुत्तों का अहम रोल है। सोमवार तड़के 4 बजे आतंकी तार काटकर कैम्प में घुसने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान कुत्तों के लगातार भौंकने से जवानों को लश्कर-ए-तयैबा के आतंकियों की मौजूदगी का पता चला। दूसरी ओर, कमांडेंट इकबाल ने वायरलेस सेट पर गोलियों की आवाज सुनाई दी। वे रमजान की वजह से सुबह जल्दी जाग गए थे। वे फौरन राइफल लेकर मौके पर पहुंच गए। रोजे पर रहते हुए पूरे ऑपरेशन की अगुआई की। मारे गए 4 आतंकियों के पास मिले सामान से पता चला है कि वो जवानों को बंधक बनाने आए थे। ज्यादा नुकसान के लिए कैम्प में रहे जवानों को जिंदा जलाने की मंशा से पेट्रोल साथ लेकर घुसे थे। शहरी छोड़कर मौके पर पहुंचे कमांडेंट...
- कमांडेंट इकबाल ने बताया कि जैसे ही उन्हें 45th सीआरपीएफ की बटालियन के कैम्प में फिदायीन हमले की जानकारी मिली। वह शहरी (रोजे से पहले का खाना) छोड़कर मौके पर पहुंचे। 4 आतंकी फायरिंग कर रहे थे। हमारे जवानों की अलर्टनेस से एक बड़ा हमला टल गया, नहीं तो आतंकी कई जानें ले सकते थे।
- उन्होंने कहा कि आतंकियों ने जिस जगह पर हमला किया था वो हमारी बटालियन के कैम्प से करीब 200 मीटर की दूरी पर थी। यहां जवानों की दो कंपनियां रहती हैं।
कुत्ते भौंके तो अलर्ट हो गए थे जवान
- सीआरपीएफ के एक सीनियर अफसर ने बताया कि सुम्बल कैम्प में आसपास घूमने वाले दो कुत्ते रहते हैं। जिन्हें जवान कभी-कभी खाना डाल देते थे। आतंकी हमले को नाकाम करने में इनका रोल भी अहम है। रात को दोनों कुत्ते जोर-जोर से भौंकने लगे। इससे जवानों को खतरे का हिंट मिला। कुत्ते जिस जगह के आसपास भौंक रहे थे। जवानों ने वहां इलुमिनेटर फायर किया तो आतंकियों की मौजूदगी का पता चला। कुत्तों ने कई लोगों की जिंदगी बचाई है।
चेतन चीता की है बटालियन
- सीआरपीएफ का यह कैम्प श्रीनगर से 34 किलोमीटर दूर है। सुम्बल में सीआरपीएफ की 45th बटालियन का हेडक्वार्टर है। पहले चेतन कुमार चीता इसके कमांडेंट थे। उन्होंने पिछले साल बांडीपोरा में आतंकियों का मुकाबला करते हुए नौ गोलियां लगने के बावजूद मौत को मात दी है।
- चेतन चीता के एनकाउंटर में जख्मी होने के बाद बटालियन का चार्ज कमांडेंट इकबाल को दिया गया है।
लोगों ने पथराव किया, जवानों ने नारे लगाए
- आतंकियों के मारे जाने के बाद सुम्बल इलाके में स्थानीय लोग प्रदर्शन करने लगे। सैकड़ों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे और सिक्युरिटी फोर्सेस पर पथराव करने लगे। यह लोग आतंकियों के शव मांग रहे थे। ऑपरेशन खत्म होने के बाद जवानों ने भारत माता की जय के नारे लगाए।
- सीआरपीएफ और पुलिस को भीड़ पर काबू पाने के लिए आंसू गैस छोड़नी पड़ी। एहतियातन इलाके में इंटरनेट और मोबाइल फोन सर्विस बंद कर दी गई है। सु्म्बल में बाजार बंद रहे और सड़कों पर ट्रैफिक भी रोका गया।
लंबे समय तक लड़ने की थी तैयारी
- बांडीपोरा में हमला करने वाले आतंकी सीआरपीएफ कैम्प पर कब्जे की फिराक में थे। वह जवानों को बंधक बनाकर ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की तैयारी के साथ आए थे।
- होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह के मुताबिक, हथियारों से लैस यह आतंकी कैम्प की सुरक्षा तोड़कर भीतर घुसना चाहते थे। इनके पास ग्रेनेड, राइफल के अलावा पेट्रोल बम भी थे। इससे समझा जा सकता है कि यह कैम्प में आग लगा सकते थे। उनके पास काफी मात्रा में ड्राय फ्रूट्स भी था। यानी वह लंबे समय तक लड़ने की तैयारी में थे।

श्रीनगर.नॉर्थ कश्मीर के सुम्बल में सीआरपीएफ कैम्प पर हमले की कोशिश को नाकाम करने में रोजेदार कमांडेंट इकबाल अहमद और दो कुत्तों का अहम रोल है। सोमवार तड़के 4 बजे आतंकी तार काटकर कैम्प में घुसने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान कुत्तों के लगातार भौंकने से जवानों को लश्कर-ए-तयैबा के आतंकियों की मौजूदगी का पता चला। दूसरी ओर, कमांडेंट इकबाल ने वायरलेस सेट पर गोलियों की आवाज सुनाई दी। वे रमजान की वजह से सुबह जल्दी जाग गए थे। वे फौरन राइफल लेकर मौके पर पहुंच गए। रोजे पर रहते हुए पूरे ऑपरेशन की अगुआई की। मारे गए 4 आतंकियों के पास मिले सामान से पता चला है कि वो जवानों को बंधक बनाने आए थे। ज्यादा नुकसान के लिए कैम्प में रहे जवानों को जिंदा जलाने की मंशा से पेट्रोल साथ लेकर घुसे थे। शहरी छोड़कर मौके पर पहुंचे कमांडेंट...
- कमांडेंट इकबाल ने बताया कि जैसे ही उन्हें 45th सीआरपीएफ की बटालियन के कैम्प में फिदायीन हमले की जानकारी मिली। वह शहरी (रोजे से पहले का खाना) छोड़कर मौके पर पहुंचे। 4 आतंकी फायरिंग कर रहे थे। हमारे जवानों की अलर्टनेस से एक बड़ा हमला टल गया, नहीं तो आतंकी कई जानें ले सकते थे।
- उन्होंने कहा कि आतंकियों ने जिस जगह पर हमला किया था वो हमारी बटालियन के कैम्प से करीब 200 मीटर की दूरी पर थी। यहां जवानों की दो कंपनियां रहती हैं।
कुत्ते भौंके तो अलर्ट हो गए थे जवान
- सीआरपीएफ के एक सीनियर अफसर ने बताया कि सुम्बल कैम्प में आसपास घूमने वाले दो कुत्ते रहते हैं। जिन्हें जवान कभी-कभी खाना डाल देते थे। आतंकी हमले को नाकाम करने में इनका रोल भी अहम है। रात को दोनों कुत्ते जोर-जोर से भौंकने लगे। इससे जवानों को खतरे का हिंट मिला। कुत्ते जिस जगह के आसपास भौंक रहे थे। जवानों ने वहां इलुमिनेटर फायर किया तो आतंकियों की मौजूदगी का पता चला। कुत्तों ने कई लोगों की जिंदगी बचाई है।
चेतन चीता की है बटालियन
- सीआरपीएफ का यह कैम्प श्रीनगर से 34 किलोमीटर दूर है। सुम्बल में सीआरपीएफ की 45th बटालियन का हेडक्वार्टर है। पहले चेतन कुमार चीता इसके कमांडेंट थे। उन्होंने पिछले साल बांडीपोरा में आतंकियों का मुकाबला करते हुए नौ गोलियां लगने के बावजूद मौत को मात दी है।
- चेतन चीता के एनकाउंटर में जख्मी होने के बाद बटालियन का चार्ज कमांडेंट इकबाल को दिया गया है।
लोगों ने पथराव किया, जवानों ने नारे लगाए
- आतंकियों के मारे जाने के बाद सुम्बल इलाके में स्थानीय लोग प्रदर्शन करने लगे। सैकड़ों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे और सिक्युरिटी फोर्सेस पर पथराव करने लगे। यह लोग आतंकियों के शव मांग रहे थे। ऑपरेशन खत्म होने के बाद जवानों ने भारत माता की जय के नारे लगाए।
- सीआरपीएफ और पुलिस को भीड़ पर काबू पाने के लिए आंसू गैस छोड़नी पड़ी। एहतियातन इलाके में इंटरनेट और मोबाइल फोन सर्विस बंद कर दी गई है। सु्म्बल में बाजार बंद रहे और सड़कों पर ट्रैफिक भी रोका गया।
लंबे समय तक लड़ने की थी तैयारी
- बांडीपोरा में हमला करने वाले आतंकी सीआरपीएफ कैम्प पर कब्जे की फिराक में थे। वह जवानों को बंधक बनाकर ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की तैयारी के साथ आए थे।
- होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह के मुताबिक, हथियारों से लैस यह आतंकी कैम्प की सुरक्षा तोड़कर भीतर घुसना चाहते थे। इनके पास ग्रेनेड, राइफल के अलावा पेट्रोल बम भी थे। इससे समझा जा सकता है कि यह कैम्प में आग लगा सकते थे। उनके पास काफी मात्रा में ड्राय फ्रूट्स भी था। यानी वह लंबे समय तक लड़ने की तैयारी में थे।

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