SCO समिट: भारत को मिलेगी पूर्ण सदस्यता, चीनी राष्ट्रपति से मिल सकते हैं PM मोदी

Updated on: 11 December, 2019 10:52 PM

भारत को कजाकिस्तान में 8-9 जून को होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में इस क्षेत्रीय संगठन में पूर्णकालिक सदस्य के तौर पर शामिल किया जायेगा। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद होंगे। कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच द्विपक्षीय मुलाकात की भी संभावना है। विदेश मंत्रालय ने हालांकि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ किसी बातचीत से इनकार किया ।
   
अस्ताना सम्मेलन में भारत के साथ पाकिस्तान को भी एससीओ की पूर्ण सदस्यता दी जाएगी। मोदी कजाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी वर्ल्ड एक्सपो 2017 में भी शामिल होंगे। भारत साल 2005 से ही इस सम्मेलन में पर्यवेक्षक देश के रूप में शामिल होता रहा है। साल 2015 में रूस के उफा में हुए सम्मेलन में भारत को सूचित किया गया था कि उसे समूह की पूर्ण सदस्यता दी जाएगी, जिस पर साल 2016 में ताशकंद में हुए सम्मेलन में काम शुरू किया गया।

पाकिस्तान भी अस्तान सम्मेलन में पूर्ण सदस्यता प्राप्त होने की उम्मीद कर रहा है। दोनो दक्षिण एशियाई देश चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रुस, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान के बाद एससीओ के क्रमश: सांतवें और आठवें देश होंगे। विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (यूरेशिया) जी. वी. श्रीनिवास ने यहां बताया कि भारत ने समूह में शामिल होने के लिए कुल 38 दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि एससीओ की पूर्णकालिक सदस्यता मिलने से भारत को यूरेशियन गुट के साथ संपर्क, अर्थव्यवस्था तथा आतंकवाद-रोधी सहयोग के संबंध में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक बार जब भारत एससीओ का पूर्णकालिक सदस्य बन जाएगा, तो यह गुट दुनिया की 40 फीसदी आबादी तथा लगभग 20 फीसदी वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का प्रतिनिधित्व करेगा।

मोदी ने अस्ताना रवाना होने से पहले अपने बयान में कहा, “हमने पिछले साल एससीओ की ताशकंद बैठक के दौरान पूर्णकालिक सदस्यता की प्रक्रिया शुरू की थी। मैं एससीओ के साथ भारत के गहरे सहयोग की कामना करता हूं, जिससे हमें अन्य चीजों के साथ-साथ आर्थिक, संपर्क तथा आतंकवाद-रोधी सहयोग में मदद मिलेगी।” उन्होंने कहा कि भारत का एससीओ के सदस्यों के साथ दीर्घकालिक संबंध है और वह एससीओ के माध्यम से परस्पर बेहतरी तथा अपने देशों व अपने लोगों की और उन्नति की कामना करते हैं।

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