बरेली बस हादसा: रो पड़ा शमशान, 24 शवों का एक साथ हुआ अंतिम संस्कार

Updated on: 21 April, 2019 02:24 PM

बरेली।
यूपी के बरेली के बिथरी बड़ा बाईपास बस हादसे में मारे गए 24 लोगों का शुक्रवार को सिटी शमशान भूमि पर अंतिम संस्कार किया गया। इसमें 3 बच्चों के शवों को दफना दिया गया। इस दौरान मृतकों के परिजनों का रोना-बिलखना देख वहां मौजूद हर आदमी गमगीन हो गया। अंतिम संस्कार के समय डीएम, एसएसपी के साथ ही पुलिस-प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।

बीते 3 जून की रात दिल्ली से गोंडा जा रही रोडवेज बस को बिथरी बड़ा बाईपास पर ट्रक ने टक्कर मार दी थी। बस में लगी आग में जलकर 24 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। बुरी तरह जले शवों की शिनाख्त नहीं हो सकी। उनका डीएनए सैंपल लेने के बाद शुक्रवार को शवों का अंतिम संस्कार किया गया। सुबह 9 बजे पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों की देखरेख में शव सिटी शमशान भूमि लाए गए। शवों में 3 बच्चों की लाशें भी थीं।

उनको शमशान भूमि में दफनाया गया। सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं की मदद से पुलिस ने 21 चिताएं बनाईं। करीब 10:20 बजे शवों को एक साथ मुखाग्नि दी गई। डीएम पिंकी जोवेल ने बताया कि डीएनए की रिपोर्ट आने में तीन से चार सप्ताह का समय लगेगा। उसके बाद ही मुआवजे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।

हर लाश देख बिलख पड़ते थे घरवाले

शवों की शिनाख्त नहीं हो सकी थी। ऐसे में घरवालों को यह नहीं पता था कि कौन सा शव उनके अपने का है। जब भी एंबुलेंस से कोई शव निकाला जाता, वहां मौजूद परिजन रोने-बिलखने लगते। पूरा शमशान रोने-चीखने की आवाज से गूंज रहा था।

दिखा पुलिस का मानवीय चेहरा

आम लोगों में अपने रुखेपन और सख्तमिजाजी के लिए जानी जाने वाली पुलिस का मानवीय चेहरा नजर आया। शमशान भूमि में जहां शव आते ही लोग नाक पर कपड़ा लगा लेते थे, वहीं पुलिसवाले शवों को उठाकर चिता पर रख रहे थे। कोई चिता पर लकड़ी सजा रहा था तो कोई गट्ठर की गांठ खोलकर शव बाहर निकाल रहा था। खाकी का यह चेहरा कम ही देखने को मिलता है।

पहले ही चिता में लगा दी आग

शमशान भूमि में एक चिता को मानसिक रूप से कमजोर युवक ने पहले ही आग लगा दी। जैसे ही पहला शव चिता पर रखा गया, वहां खड़े युवक ने उसमें आग लगा दी। यह देख लोगों ने उसे पकड़ लिया और पीटकर वहां से भगा दिया। उसके बाद सभी चिताओं पर शव रखे गए और मंदिर के पुजारी ने बारी-बारी उनको मुखाग्नि दी।

पिता का शव पहचान गया बेटा

शमशान भूमि पहुंचे पृथ्वीराज ने आखिरी समय मे पिता की लाश पहचान ली। जैसे ही शव के साथ सामान में उसने घड़ी देखी वह बिलख पड़ा। उसने कहा कि यह उसके पिता की लाश है। इस पर डीएम की अनुमति पर उसे शव को मुखाग्नि देने की अनुमति दे दी गई।

 

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