यूपी: दागी पुलिसकर्मियों पर शिकंजा, अपराधी होंगे पस्त

Updated on: 19 June, 2019 07:19 PM

कानून व्यवस्था सियासी दलों के लिए मुद्दा बना हुआ है। विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं तो सत्तारूढ़ दल दावा कर रहा है कि विरासत में मिली बिगड़ी कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए संजीदगी से कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश पुलिस ने दागी पुलिस कर्मियों की पहचान, समाधान दिवस के साथ ही सख्त कार्रवाई के जो कदम उठाने शुरू किए हैं उनका असर फिलहाल भले ही न दिख रहा हो लेकिन जानकार मानते हैं कि जल्द ही प्रभावी नतीजे सामने आएंगे। प्रदेश के डीजीपी सुलखान सिंह इसे लेकर संजीदा हैं।

प्रदेश पुलिस ने सबसे पहले ऐसे 626 दागी पुलिस कर्मियों को पहचान की। पूर्व आईजी श्रीधर पाठक कहते हैं-नई सरकार के लिए सबसे बड़ी दिक्कत पिछली सरकार में निरंकुश हो चुके सिपाही-दरोगा हैं। भ्रष्टाचार में संलिप्त रहे ऐसे पुलिसकर्मियों के खिफाफ सख्ती से कार्रवाई करनी होगी। साथ ही तैनाती में भी सावधानी बरतनी होगी।

यही वजह रही कि डीजीपी ने सभी आईजी जोन व डीआईजी रेंज को ऐसे पुलिस कर्मियों की पहचान के निर्देश दिए। इसके तहत 7 इंस्पेक्टर,65 सब-इंस्पेक्टर, 489 सिपाही और 16 पुलिस ड्राइवरों का चयन किया गया। डीजीपी सुलखान सिंह कहते हैं कि यह ऐसे पुलिस कर्मी हैं जिनके खिलाफ अपराधिक तत्वों से संबंध की शिकायतें थीं। या उनके करीबी अथवा परिवार वाले किसी न किसी तरह से अपराध में संलिप्त होने के आरोप थे।

इन सभी का तबादला दूर कर दिया गया है। उन पर निगाह रखी जा रही है। निसंदेह इसका असर जिलों की पुलिसिंग पर पड़ेगा। यही नहीं पुलिस महकमे ने जांच में लापरवाही बरतने पर एक दर्जन से अधिक पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई भी की है। पूर्व आईजी अरुण कुमार गुप्ता कहते हैं- सरकारी की नियत, मंशा और पहल अच्छी है। जरूरत बस फील्ड में तैनात एसपी, डीआईजी को कार्यशैली में सुधार की है। मसलन, अपराधियों के खिलाफ लगातार छापेमारी हो। अवैध वसूली रुके। साथ ही मातहत पुलिस कर्मी अपने कर्तव्यों का ठीक से पालन करें।

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