पंजाब: 6000 करोड़ रुपए के ड्रग्स रैकेट मामले में राजनेताओं का नाम आने से मचा बवाल

Updated on: 16 September, 2019 02:54 AM

पंजाब की राजनीति में पिछले 3 साल से छाए हुए 6000 करोड़ रुपए के ड्रग्स रैकेट मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट मोहाली की सीबीआई कोर्ट में दाखिल कर दी है. इस चार्जशीट में हैरान करने वाले कुछ नाम सामने आए हैं. इसमें अकाली दल में रह चुके पूर्व कैबिनेट मंत्री सरवन सिंह फिल्लौर और उनके बेटे दमनवीर सिंह फिल्लौर का नाम शामिल है. फिलहाल फिल्लौर पिता-पुत्र अकाली दल को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं.

वहीं पूर्व की अकाली दल सरकार के वक्त मुख्य संसदीय सचिव रहे अविनाश चंद्र का नाम भी इस चार्जशीट में है. अविनाश चंद्र अभी फिलहाल अकाली दल को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं. इसके अलावा इस चार्जशीट में 12 और लोगों के नाम भी शामिल हैं. लेकिन इस सप्लीमेंट्री चार्जशीट की खास बात ये है कि जिस राजनीतिक शख्सियत को लेकर ड्रग्स रैकेट में उसकी संलिप्तता को लेकर पूरे विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान काफी हंगामा हुआ, उस अकाली दल के सीनियर लीडर बिक्रम सिंह मजीठिया का नाम इस चार्जशीट में शामिल ही नहीं है.

गौरतलब है कि 2012 में पंजाब पुलिस के डीएसपी जगदीश भोला की ड्रग्स रैकेट चलाने को लेकर गिरफ्तारी हुई थी. इसके बाद ये मामला सुर्खियों में आया था. जगदीश भोला ने शुरुआती जांच में परिवर्तन निदेशालय को ड्रग्स रैकेट में कई राजनेताओं के शामिल होने की बात बताई थी. 2013 में प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले की जांच शुरू की थी. इस मामले में अब तक एनडीपीएस एक्ट के तहत 78 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं.

प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक अभी भी इस मामले की जांच जारी है और कई सबूत उन्हें मिल चुके हैं जिसके बाद अभी कई और लोगों के नाम और उनकी कंपनियों और फर्मों को चार्जशीट में शामिल किया जा सकता है. प्रवर्तन निदेशालय की जांच में इस ड्रग्स रैकेट के 6000 करोड़ से भी ज्यादा के होने की आशंका जताई गई है. इस ड्रग्स रैकेट मामले में अब तक 60 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है. पहली चार्जशीट में 48 और फिलहाल में दाखिल की गई दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में 12 लोगों के नाम शामिल हैं.

प्रवर्तन निदेशालय के इस सप्लीमेंट्री चार्जशीट को फाइल करने के साथ ही पंजाब में राजनीतिक भूचाल भी आ गया है. अकाली दल ने कहा कि उन्हें अपने दो राजनेताओं के ड्रग्स रैकेट में शामिल होने को लेकर पहले से ही शक था इसीलिए इन दोनों ही नेताओं को 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट नहीं दी गई थी. जिसके बाद इन दोनों ही राजनेताओं ने कांग्रेस जॉइन कर ली. अकाली दल के प्रवक्ता और पूर्व कैबिनेट मंत्री दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि अब ये साफ हो गया है कि जिन लोगों को अकाली दल ने ड्रग्स रैकेट में शामिल होने की वजह से बाहर का रास्ता दिखाया था वो कांग्रेस में बड़ी आसानी से शामिल हो गए और कांग्रेस इस तरह के भ्रष्ट राजनेताओं को शह देने वाली पार्टी बन गई है.

वहीं कांग्रेस ने इस पूरे मामले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच और सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर ही सवाल खड़े कर दिए. कांग्रेस के सीनियर लीडर बलबीर सिद्धू ने कहा कि इस मामले में अकाली दल को छोड़ चुके राजनेताओं को फंसाकर अकाली दल के इशारे पर बीजेपी की केंद्र सरकार और केंद्र सरकार की जांच एजेंसियां उन छोटे राजनेताओं को फंसाने में लगी हैं जो अकाली दल को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं. कांग्रेस ने सवाल खड़े किए कि डीएसपी जगदीश भोला ने जिस राजनेता बिक्रम सिंह मजीठिया का नाम सबसे पहले बताया था उसे लेकर अपनी चार्जशीट में प्रवर्तन निदेशालय ने कोई भी बात नहीं लिखी है, जो कि इस चार्जशीट पर सवाल खड़े करता है.

पंजाब के इस ड्रग्स रैकेट के खुलासे के बाद से ही इस मामले को लेकर जमकर राजनीति होती रही है और अब जिस तरह से सप्लीमेंट्री चार्जशीट में उन राजनेताओं के नाम सामने आए हैं जो कभी अकाली दल में हुआ करते थे और फिलहाल कांग्रेस में हैं तो इससे ये साफ हो गया है कि ड्रग्स रैकेट के तार राजनेताओं से भी जुड़े थे. इसी वजह से अब इस पूरे मुद्दे पर एक बार फिर से पंजाब की राजनीति गर्म है.

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