सलाहः मान लो चीन, भारत के साथ तालमेल है जरूरी- पूर्व अमेरिकी राजनयिक

Updated on: 20 October, 2019 07:18 AM

सिक्किम सेक्टर के डोकलाम इलाके में भारतीय एवं चीनी सैनिकों के बीच जारी गतिरोध के बीच अमेरिका की एक पूर्व राजनयिक ने कहा है कि चीन को यह मान लेना चाहिए कि भारत 'एक ऐसी शक्ति है, जिसके साथ तालमेल बैठाना जरूरी है'। उन्होंने कहा कि बीजिंग के व्यवहार के कारण क्षेत्र के देश प्रभावित हो रहे हैं।

पूर्व सहायक विदेश मंत्री (दक्षिण एवं मध्य एशिया) रह चुकीं भारतीय मूल की अमेरिकी निशा देसाई बिस्वाल ने कहा कि मुझे लगता है कि चीन को यह मान लेना चाहिए कि एशिया में रणनीतिक एवं सुरक्षात्मक क्षमता बढ़ रही है और निश्चित तौर पर भारत एक ऐसी शक्ति है, जिसके साथ तालमेल बैठाना जरूरी है।
 
बिस्वाल ओबामा प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए एक अहम व्यक्ति रही हैं।उन्होंने कहा कि चीन की ओर से विभिन्न सीमावर्ती बिंदुओं पर समुद्र में एवं जमीन दोनों पर आक्रामक हरकतें की जा रही हैं एवं ऐसे संकेत भेजे जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मैं चीन की भावनाएं समझती हूं और मुझे लगता है कि वह खुद को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रभावशाली देश के तौर पर पेश करने की कोशिश में है। मेरा मानना है कि चीन को यह बात मान लेनी चाहिए कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में देश उसके बर्ताव के कारण और उसके एकपक्षीय व्यवहार के कारण अस्थिरता का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यकीन जताया कि दोनों देशों के नेता इस स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोकने में कामयाब रहेंगे।

अमेरिका भारत को कूटनीतिक महत्व वाला सहयोगी मानता है
अमेरिका की नई सरकार में भारत-अमेरिका संबंधों की वकालत करते हुए पू्र्व अमेरिकी राजनयिक ने कहा है कि ट्रंप प्रशासन भारत को मूल तौर पर कूटनीतिक महत्व वाला सहयोगी मानता है। पूर्व सहायक विदेश मंत्री (दक्षिण और मध्य एशिया) निशा देसाई बिस्वाल ने कहा, कि ट्रंप प्रशासन भी बराक ओबामा प्रशासन की तरह ही भारत को मूल तौर पर कूटनीतिक सहयोगी के रूप में स्वीकार करता है। वह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर ही आधारित समान मूल्य, लक्ष्य और उद्देश्यों वाले और समग्र सुरक्षा मुहैया कराने में क्षमताएं बढ़ाने वाले देश के तौर पर भारत को महत्व देता है।

बिस्वाल ने कहा कि ओबामा प्रशासन ने प्रशांत महासागर और पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत को कूटनीतिक साझेदार बनाकर बड़ा दांव खेला था। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि ट्रंप प्रशासन इसे जारी रखेगा। हम कुछ घोषणाओं और रक्षा सहयोग के मामले इसे देख रहे हैं। बिस्वाल ने बताया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच पिछले महीने हुई सफल बैठक दोनों देशों के संबंधों में सुधार एवं मजबूती का संकेत है।
 
उन्होंने कहा कि मैं मानती हूं कि भारतीय प्रधानमंत्री की वाशिंगटन यात्रा काफी अच्छी रही। दोनों ही पक्षों ने न्यायसंगत तरीकों से अपनी महत्वाकांक्षाओं को कम ही रखा और यात्रा से पहले मतभेद वाले कुछ क्षेत्रों को इससे अलग ही रखा।।  

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