करोड़ों खर्च, सीवरेज-जर्जर सड़कों से जूझ रहे काशीवासी

Updated on: 20 October, 2019 05:48 PM

विकास कार्य के लिए वार्डों में पांच करोड़ तक हुए खर्च - अलग-अलग किस्तों में धन का किया गया था आवंटन - पांच साल बाद भी पेयजल व सीवर में जूझ रही जनता वाराणसी। नगर निगम ने वार्डों के विकास पर करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन काशीवासी अब भी मूलभूत सूविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। सीवर व जर्जर सड़कें अब भी नासूर हैं। हालत यह कि गर्मी में लोगों को दूसरे वार्डों से पानी लेना पड़ता है। पार्षदों के अधिकार खत्म होने में एक माह से भी कम समय रह गया। हर वार्ड में पचास लाख से 10 करोड़ रुपये तक खर्च हो गए। लेकिन जनता संतुष्ट नहीं है। नागरिकों की मानें तो पार्षदों ने विकास के नाम पर घरों के आसपास व अपनों के मुहल्लों में काम कराये। पेयजल समस्या को दूर करने में पार्षद फेल रहे। रिकॉर्ड बताते हैं पिछले कार्यकालों की अपेक्षा में इस बार विकास के नाम खूब पैसे बरसाए गए। शिकायत है कि अब भी शहर जलभराव की दिक्कत से उबर नहीं पाया है। हालांकि इन्हीं के बीच में दस पार्षदों से बातचीत हुई तो उन्होंने वार्डों में विकास की गंगा बहाने का दावा किया। पार्षदों से बातचीत पर अमरीष सिंह की रिपोर्ट...। 1. वार्ड में गलियों और चौका बनाने के लिए चार करोड़ रुपये तक खर्च किए। बजट से ही रामपुरी कॉलोनी में इंटरलॉकिंग से सालों की समस्या से निजात दिलाया। प्रदीप होटल के बगल की गली, हरसेवानंद स्कूल जानी वाली सड़कों की मरम्मत हुई। तेलियाबाग में सीवर समस्या से निजात दिलायी। बीना सिंह, पार्षद-जगतगंज 2. पिछले पांच साल में ढाई करोड़ रुपये से लोको छित्तूपुर वार्ड के लोगों को सुविधाएं दिलाने का पूरा प्रयास किया गया। सनबीम स्कूल लहरतार और सिगरा के आसपास के सभी गलियों को सुव्यस्थित कर दिया गया। हैप्पी माडल स्कूल के आसपास लाखों रुपये खर्च कर चौका मरम्मत कराया गया। शांति सिंह, पार्षद-लोको छित्तूपुर 3. एक करोड़ से सालों से जूझ रहे सीवर और पेयजल की समस्या से लोगों को निजात दिलायी। मिनी नलकूप लगवाया। 200 मीटर सीवर लाइन बिछवायी गयी। सीवरेज और पेयजल पाइप लाइन को अलग कराया गया। लाइटिंग की समस्या भी दूर की गया। हालांकि अब भी कुछ मुहल्लों में चौका के रीसेटिंग का कार्य चल रहा है। अनिसुर्रहमान अंसारी, पार्षद-रसूलपुरा 4. सिद्धगिरी बाग, कस्तूरबानगर, अशोकनगर, सिंधुनगर, मौलवी बाग सहित सभी मुहल्लों में बराबर विकास कराया। लोगों से पूछ-पूछकर उनकी शिकायतों का निस्तारण किया। इन इलाकों में सड़क, इंटरलॉकिंग और बिजली पोल लगवाने के लिए सड़क से सदन तक लड़ते रहे। सालों से सीवर से जूझ रहे छोटी गैबी के इलाकों कार्य चल रह है। शंकर बिसनानी, पार्षद-सिगरा 5. लगभग चार करोड़ से वार्डों में चौमुखी विकास कराया गया। लाखों रुपये से चौका और सड़क मरम्मत करायी। शंकुलधारा पार्क में एक महीने पहले बड़ा ट्यूबवेल लगवाया। प्राचीन रामलीला मैदान में इंटरलॉकिंग से सुंदरीकरण व प्रकाश व्यवस्था कराई। क्रांतिपल्ली कॉलोनी का हृदय के तहत सुंदरीकरण कराया गया। अशोक सेठ, पार्षद-खोजवां 6. 70 लाख से लक्सा स्थित टेकरा मठ के पास सड़क निर्माण, सीवर लाइन आदि का कार्य कराया। संतनगर में 15 लाख से इंटरलॉकिंग, रथयात्रा से गुरुबाग तक नाली निर्माण व लक्सा में जलभराव दूर करने के लिए नाली की मरम्मत करायी। औरंगाबाद में नाली बनाने का काम चल रहा है। सभी वार्डों में बिजली के खम्भों और चौका की रीसेटिंग कराई। पांच सालों में विकास पर पांच करोड़ रुपये खर्च किए गए। ओमप्रकाश चौरसिया, पार्षद-लक्सा 7. वार्ड के चहुंमुखी विकास के लिए डेढ़ करोड़ से ऊपर के कार्य कराए। सालों से पेयजल संकट से जूझ रहे लोगों के लिए ट्यूबवेल लगवाया। गलियों का निर्माण व चौका रीसेटिंग पर लाखों रुपये खर्च किए गए। शहर का प्रमुख इलाका होने के नाते आसपास के मुहल्लों में भी कार्य कराए गए। लाइटिंग के लिए कई पोल लगवाए गए। हालांकि इनके बीच में आईपीडीएस की वजह से विकास कार्य प्रभावित भी हुए। अनिल शर्मा, पार्षद-नवाबगंज 8. वार्ड में कुल 27 गलियों का चौका मरम्मत कराया गया। पांच नयी गलियों का निर्माण कराया गया, जो कच्चा रास्ता था। प्रधानमंत्री को एक बड़ा ट्यूबवेल का प्रस्ताव डुमरॉव कॉलोनी अस्सी में दिया गया था, जिस पर मुहर लग गयी। डेढ़ सौ से ज्यादा लाइटें लगवायी गयीं। 200 चैम्बर का निर्माण कराया गया। पांच स्थानों पर पेयजल की पाइप लाइन का विस्तार हुआ। 20 हैंडपम्पों को रीबोर कराया। गोविंद शर्मा, पार्षद-भदैनी

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