मानसून सत्र: राष्ट्रपति के भाषण में नेहरू का नाम न होने पर कांग्रेस का हंगामा

Updated on: 13 November, 2019 11:34 AM

कांग्रेस ने सरकार पर गांधी-नेहरु के अपमान का आरोप लगाते हुए आज राज्यसभा में भारी शोरगुल किया जिसके कारण सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी और शून्यकाल बाधित हुआ।

उप सभापति पी जे कुरियन ने विधायी कामकाज निपटाने के बाद जैसे ही सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाने का प्रयास किया तो कांग्रेस के उप नेता आनंद शर्मा ने नियम 267 का मामला उठाने की अनुमति मांगी। इसका भारतीय जनता पार्टी के भूपेंद्र यादव ने विरोध किया और कहा कि इसके लिए सभापति से पूर्व अनुमति ली जानी चाहिए।

श्री कुरियन ने कहा कि मामला सुनने के बाद ही तय किया जाएगा कि इसकी अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं। इसके बाद श्री शर्मा ने कहा कि सरकार गांधी- नेहरू का अपमान कर रही है और उनके नामों का जानबूझकर उल्लेख नहीं  किया जा रहा है। इसका सत्ता पक्ष ने विरोध किया। सदन के नेता अरुण जेटली ने कहा कि कांग्रेस के नेता देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर टिप्पणी कर रहे हैं और उनका पूरा वक्तव्य कार्यवाही से निकाल देना चाहिए।

इस पर विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद तथा श्री शर्मा ने कहा कि उन्होंने सर्वोच्च संवैधानिक पद का नाम नहीं लिया है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद श्री कुरियन ने कहा कि वह मामले को देखेंगे और अगर श्री शर्मा के वक्तव्य में सवोर्च्च संवैधानिक पद पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कोई टिप्पणी हुई तो उसे निकाल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्री शर्मा को यह मामला उठाने की अनुमति नहीं है। इसके बाद श्री कुरियन ने शून्यकाल शुरू करने का प्रयास किया। 

इस बीच कांग्रेस के सदस्य गांधी-'नेहरू का अपमान नहीं सहेंगे'के नारे लगाने लगे। इस बीच कई सदस्यों ने शून्यकाल के दौरान अपना वक्तव्य दिया जो सुना नहीं जा सका।

श्री कुरियन कांग्रेस के सदस्यों से शांत होने और शून्यकाल चलने देने की अपील की लेकिन उन पर इसका कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने 11.44 बजे सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी।

निलंबन वापस लेने को लेकर भी हंगामा

कांग्रेस के छह सदस्यों का निलंबन वापस लेने की मांग को लेकर विपक्षी सदस्यों ने आज लोकसभा में फिर से हंगामा किया। सुबह सदन की कार्यवाही शुरु होते ही कांग्रेस, माकपा और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से कांग्रेसी सदस्यों का निलंबन वापस लेने की मांग करते हुए शोर शराबा करने लगे और काम रोको प्रस्ताव का नोटिस दिया लेकिन अध्यक्ष ने इसे अस्वीकार कर दिया।

प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरु होते ही कांग्रेस और तृणमूल के सदस्य न्याय करो न्याय करो,सरकार की तनाशाही नहीं चलेगी चलेगी के नारे लगाते हुए अध्यक्ष के आसन के समीप आकर जोर जोर से चिल्लाने लगे। इस दौरान सदस्यों ने किसानों से जुड़े मुद्दों सहित कई अन्य मुद्दों को लेकर भी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस हंगामे के बीच ही प्रश्नकाल चलता रहा।

पर्चे फाड़ कर अध्यक्ष के आसन की ओर फेंकने के कारण कांग्रेस के छह सदस्यों को सोमवार को सदन से पांच कार्य दिवस के लिए निलंबित कर दिया गया था।

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