गलती बैंक की और 11 साल इंसाफ के लिए चक्कर काटती रही महिला

Updated on: 21 August, 2019 03:55 PM

एक महिला को अपनी रकम वापस पाने और बैंक अधिकारियों की गलती साबित करने के लिए 11 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में महिला के हक में फैसला सुनाया।
आयोग ने सरकारी बैंक को उसकी लचर कार्यप्रणाली के लिए दोषी करार दिया। साथ ही, बैंक की गलती की वजह से हुए महिला के नुकसान की भरपाई को ब्याज समेत चुकाने के निर्देश दिए हैं। आयोग के न्यायिक सदस्य एन के कौशिक की पीठ ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को आदेश दिया है कि वह महिला को उसकी एक लाख 29 हजार रुपये की रकम नौ फीसदी ब्याज समेत लौटाए। इस राशि पर बैंक को 11 साल का ब्याज देना होगा। आयोग ने फैसले में कहा है कि सरकारी महकमों में अफसर लापरवाहपूर्ण तरीके से काम करते हैं। इसी का नतीजा है कि आम आदमी को लाखों का नुकसान हो जाता है और इन कर्मियों की कान पर जूं नहीं रेंगती।
शिकायतकर्ता रही मुनिशा प्रशंसा की हकदार हैं, क्योंकि अपनी शिकायत को साबित करने के लिए महिला ने खुद ही साक्ष्य भी पेश किए। शिकायतकर्ता महिला ने 13 मार्च 2006 को एसबीआई हेल्पलाइन पर एटीएम कार्ड चोरी होने और कार्ड बंद करने की जानकारी दी थी। सुनवाई के दौरान महिला द्वारा हेल्पलाइन पर की गई शिकायत ही अहम सबूत बना। 

सूचना देने के बाद भी कार्ड बंद नहीं किया
निजामुद्दीन की मुनिशा को एसबीआई से 13 मार्च 2006 को एटीएम कार्ड मिला था। महिला उसी दिन अपना कार्ड और पिन नंबर लेकर एटीएम पैसे निकालने गई। रास्ते में एटीएम कार्ड और पिन का लिफाफा चोरी हो गया। मुनिशा तुरंत निजामुद्दीन एसबीआई की शाखा में गई और अपना एटीएम कार्ड व पिनकोड चोरी होने की लिखित सूचना दी। साथ ही उसने एटीएम कार्ड बंद करने का आग्रह भी किया। परंतु बैंक अधिकारियों ने लापरवाही दिखाते हुए 29 मार्च तक एटीएम कार्ड बंद नहीं किया। इस दौरान महिला के खाते से एक लाख 29 हजार 60 रुपये निकाल लिए गए।

बैंक पर एक लाख का जुर्माना
महिला को एक अदालत से दूसरी अदालत के चक्कर कटवाने पर आयोग ने एसबीआई पर एक लाख का जुर्माना भी किया है। आयोग ने कहा है कि सरकारी महकमों को उनकी जिम्मेदारी के निर्वाह का सबक सिखाना जरूरी है। बैंक पर 1 लाख रुपये का जुर्माना जरूरी है।

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