अंतिम सोमवार पर दोपहर दो बजे से काशी विश्वनाथ का सिर्फ झांकी दर्शन

Updated on: 17 October, 2019 07:13 AM

 सावन के अंतिम सोमवार पर दोपहर पौने दो बजे के बाद काशी विश्वनाथ का सिर्फ झांकी दर्शन ही हो सकेगा। न तो किसी को गर्भगृह में जाने की इजाजत होगी और न ही कोई जलाभिषेक कर सकेगा। ऐसा चंद्रग्रहण के कारण होने जा रहा है। शाम में होने वाली सप्तर्षि आरती भी दोपहर 1.30 से पहले कर ली जाएगी।

 सावन का अंतिम सोमवार 7 अगस्त को है। इसी दिन रात 10.53 बजे से चंद्र ग्रहण भी लगेगा। शास्त्रानुसार सूतक काल नौ घंटे पहले शुरू हो जाता है। इसके कारण श्रीकाशी विश्वनाथ समेत सभी मंदिर पूजन अर्चन के बाद सूतक काल अर्थात दोपहर 1.53 से पहले बंद हो जाएंगे। लिहाजा आम भक्तों का विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में भी प्रवेश बंद हो जाएगा।

 सावन का सोमवार होने और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए विश्वनाथ मंदिर में सूतक के दौरान भी झांकी दर्शन की व्यवस्था रहेगी। मंदिर में प्रवेश होगा लेकिन सूतक लगने के बाद गर्भगृह में प्रवेश नहीं हो सकेगा। गर्भगृह के कपाट इस तरह से बंद होंगे जिससे बाहर से ही बाबा का दर्शन किया जा सकेगा। कोई दरवाजे या गर्भगृह को स्पर्श नहीं कर सकेगा। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष पं.अशोक द्विवेदी के अनुसार शाम को होने वाली सप्तर्षि आरती भी दोपहर 1.30 बजे होगी।

 पंडित द्विवेदी के अनुसार वर्ष में एक दिन महंत परिवार की ओर से होने वाला झूलनोत्सव इस दौरान गर्भगृह में होता रहेगा। गर्भगृह में केवल महंत परिवार ही होगा। दोपहर बाद 3.30 तक झुलनोत्सव चलेगा और इसके बाद गर्भगृह में भी कोई नहीं रहेगा। गर्भगृह का पट मंगलवार को मंगला आरती के साथ खुलेगा। कर्मकाण्डी पं. रत्नेश त्रिपाठी के अनुसार चन्द्रग्रहण रात 10.53 बजे लगेगा। मध्यकाल रात 11.50 बजे और मोक्ष 12.48 बजे होगा। 

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