बाढ़ के कहर से गोंडा में बिगड़े हालात, प्रशासन लाचार

Updated on: 21 April, 2019 04:23 PM

घाघरा और सरयू नदियों के लगातार जारी कहर से जिले में सबकुछ ठहर गया है। स्कूलों समेत आंगनबाड़ी केन्द्रों पर ताला पड़ चुका है। गांवों से निकलकर सड़कों तक पहुंच चुके बाढ़ के पानी ने कई इलाकों के संपर्क एक दूसरे से तोड़ दिए हैं। चौतरफा बाढ़ के प्रकोप के कारण जिला प्रशासन लाचार दिखाई दे रहा है।

अब तक एक लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं जिनको मदद पहुंचाने में प्रशासन संसाधनों की कमी का रोना रो रहा है। तरबगंज और करनैलगंज के साथ साथ गोंडा अयोध्या मार्ग और रेलवे लाईन तक बाढ़ का पानी दस्तक दे रहा है। रेलवे ने भी ट्रेनों के संचालन के लिए एलर्ट जारी कर दिया है। वही गोंडा लखनऊ राज मार्ग पर बने घाघरा पुल को कभी भी यातायात संचालन रोका जा सकता है।

जिससे गोंडा-लखनऊ आने जाने वालों को भारी दिक्कत आ सकती है। नवाबगंज के दुल्लापूर गांव के निकट और पटपरगंज रोड पर और ढेमवा मार्ग के दोनो किनारो पर सैकड़ो पीड़ित परिवार अपने मवेशीयो के साथ शरण ले रखी है। जलस्तर के खतरे के निशान से तीन मीटर उपर पहुंच जाने से बाढ के जद मे और भी कई मजरे आ गये है। सरयू के उफान से माझा मे अब दूर-दूर तक सिर्फ पानी ही नजर आ रहा है। सड़क, चकमार्ग, पुलिया सब पर नावे चल रही है। स्कूल एव आंगनवाड़ी केन्द्र सब ठप्प हो गए हैं।

परसपुर ब्लॉक के आठ पंचायत पूर्ण रूप से बाढ़ के घेरे में हैं। उफनाई घाघरा नदी का पानी अब पंचायतों से होकर सरयू नदी में समाहित हो रहा है। इससे सरयू नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है। प्रभावित गावों के ग्रामीण अपने मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थान की तरफ पलायन कर रहें है। बाढ़ पीढ़ितों के सामने खाद्यान्न, शौचालय, शुद्ध पेयजल, मवेशियों के लिए चारें का संकट खड़ा हो गया है।

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