लूट की घटना से जरायम की दुनियां में बुढ़वा ने रखा था कदम

Updated on: 07 December, 2019 08:01 PM

चिरैयाकोट थाना क्षेत्र के अल्देमऊ निवासी सुजीत सिंह बुढ़वा शुरु से ही मनबढ़ किस्म का था। वह चकाचौंध की दुनियां में अपने को मुकाम पर ले जाने के लिए लूट की घटनाओं को ताबड़तोड़ अंजाम देने लगा था। तीन साल पहले से चिरैयाकोट में लूट की घटना के दौरान प्रकाश में आया था। पुलिस की कस्टडी से भाग निकला था। युवाओं को मोटी रकम देकर गिरोह बना लिया था। पुलिस ने अपनी डायरी में इस दुर्दांत अपराधी का नाम डी-9 रखा था। बलिया, मऊ, आजमगढ़ समेत पूर्वांचल के कई जनपदों में 39 से ज्यादे इसके ऊपर केस दर्ज हैं।

सुजीत सिंह बुढ़वा एक साधारण परिवार का था। इसके पिता कमलेश सिंह पहले तो अपने इस बेटे की हरकत को नजर अंदाज करते थे। लेकिन शुरु से ही मनबढ़ होने के नाते यह गांव और सम्पर्क में आने वाले युवाओं को जरायम की दुनियां में प्रवेश के लिए उकसाने लगा था। सबसे पहले सुजीत सिंह उर्फ बुढ़वा ने जनपद के चिरैयाकोट थाना अंतर्गत वर्ष 2014 में लूट की घटना को अंजाम दिया था। इस दौरान इसने गोली भी मारी थी। इसके बाद पुलिस बुढ़वा की गिरफ्तारी में जुट गयी थी। घटना को अंजाम देने व गिरोह बनाने के बाद यह पीछे मुड़कर फिर नहीं देखा। पूर्वांचल में आतंक का पर्याय बन गया। इसने जनपद में अकेले 10 लूट और हत्याओं को अंजाम दिया। जबकि बलिया, आजमगढ़, मिर्जापुर समेत पूर्वांचल के कई अन्य जनपदों में घटनाओं को अंजाम दिया। सुजीत सिंह बुढ़वा के ऊपर 39 से अधिक संगीन अपराध दर्ज हैं। आजमगढ़ में इस दुर्दांत अपराधी को मारे जाने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली है।

पुलिस मुठभेड़ के बाद भाग निकला था बुढ़वा
मऊ। करीब डेढ़ साल पूर्व चिरैयाकोट थाना क्षेत्र के सेंचुई पुलिया के पास पुलिस से हुई मुठभेड़ के दौरान बुढ़वा पुलिस पर फायर करते हुए भाग निकला था। इसके बाद वह 50 हजार का इनामिया घोषित किया गया था। बाद में पुलिस ने इसे फिर मुठभेड़ के दौरान ही यहां से गिरफ्तार किया था, जो इन दिनों रामपुर जेल में निरुद्ध चल रहा था। जेल में रहने के दौरान भी इसके साथियों ने कई बार गाजीपुर और मऊ में पेशी के दौरान छुड़ाने का प्रयास किया था, लेकिन पुलिस की सक्रियता के चलते इसके साथी नाकाम हो गये थे।

एमएलसी यशवंत सिंह के दो करीबियों की थी हत्या
मऊ। पूर्वांचल में आतंक का पर्याय बना सुजीत सिंह उर्फ बुढ़वा पूर्वांचल में आतंक का पर्याय बना हुआ था। वह ताबड़तोड़ घटनाओं को अंजाम दे रहा था। पूर्व एमएलसी यशवंत सिंह के करीबी रहे झंडा पाण्डेय और रवि मौर्या की इसने हत्या कर सनसनी फैला दी थी। इस घटना के बाद से यह पुलिस के लिए काफी चुनौती बन गया था। पुलिस लगातार डी-9 गिरोह पर शिकंजा कस रही थी। लेकिन बुढ़वा के जेल में होने के चलते वह इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रही थी। वह जेल से ही तमाम घटनाओं को अपने गुर्गों के माध्यम से अंजाम देता रहा।

रामलीला देखकर लौट रहे युवकों पर की थी फायरिंग
मऊ। चिरैयाकोट थाना क्षेत्र में सुजीत सिंह बुढ़वा का इस कदर आतंक हो चला था कि वह किसी को धमकाने के बाद उसके पीछे पड़ जाता था। अपराधी के गांव अल्दे मऊ के ही रामलीला देखकर लौट रहे युवकों पर इसने फायरिंग की थी। जिसमें बाल-बाल लोग बचे थे।

व्यापारी व रसूखदारों से करता था रंगदारी की मांग
जरायम की दुकायां में कदम रखने के बाद सुजीत सिंह बुढ़वा व्यापारी और रसूखदारों से रंगदारी की मांग करने लगा था। रंगदारी नहीं देने पर ऐसे लोगों की हत्या तक करना शुरु कर दिया था। बाईक एजेंसी के मालिक चिरैयाकोट निवासी विनोद सेठ की हत्या कराने के बाद इस गिरोह का नाम काफी चर्चा में आ गया था। पुलिस के लिए लगातार चुनौती बना हुआ था।

गिरोह के तीन सदस्यों का हो चुका एनकाउंटर
पूर्वांचल में आतंक का पर्याय बना डी-9 गिरोह पर पुलिस एक-एक कर शिकंजा कसना शुरु कर दी है। गिरोह को शरण देने वाले और इन्हें असलहा सप्लाई करने वालों पर भी काफी नकेल कसा है। पुलिस ने गिरोह के तीन सदस्यों का एनकाउंटर कर चुकी है। इसमें धर्मेन्द्र सिंह, सुजीत सिंह और आशीष चौबे भी मारा जा चुका है। हालांकि आशीष चौबे को वाराणसी में उसके ही साथी विक्रांत यादव द्वारा पुलिस ने मारा जाना दिखाया था।

गिरोह के विक्रांत और दीपक जेल में निरुद्ध
डी-9 गिरोह में चिह्नित सुजीत सिंह बुढ़वा समेत उसके एक-एक साथियों पर जनपद समेत पूर्वांचल ही नहीं बल्कि प्रदेश की एसटीएफ की भी नजर है। 50 हजार का ईनामियां बुढ़वा के मारे जाने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली है। अभी भी इस गिरोह का विक्रांत यादव और दीपक सिंह जेल में निरुद्ध चल रहे हैं। अब पुलिस की नजर गिरोह के लालू यादव पर भी है। पुलिस अब जेल में निरुद्ध चल रहे गिरोह से सम्बद्ध रखने वाले बड़े अपराधियों पर भी नजर रख रही है।

पिता ने भी बुढ़वा को छुड़ाने के लिए किया था प्रयास
बेटे की चाहत ने पिता को इस कदर अंधा बना दिया था कि वह अपने बेटे सुजीत सिंह बुढ़वा को छुड़ाने के लिए कई बार प्रयास किया। साथ ही बेटे के नाम पर ही पिता ने लोगों को धमकी भी देना शुरु कर दिया था। पुलिस की कार्रवाई के दौरान बेटे का साथ देने वाले इस पिता कमलेश सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हालत यह हो चुकी है कि इस परिवार का अल्देमऊ गांव में कोई नहीं है। सुजीत सिंह बुढ़वा का एक छोटा भाई है। वह भी अब गांव पर नहीं रहता है। घर पर ताला बंद रहता है।

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