म्यांमार: मोदी बोले, देशहित में कठोर कदम उठाने से नहीं डरती हमारी सरकार

Updated on: 13 December, 2019 04:16 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के समय भारतीयों का दूसरा घर बताते हुए बुधवार को कहा कि दोनों देशों की सीमाएं ही नहीं, बल्कि एक दूसरे की भावनाएं आपस में जुड़ी हुई हैं। मोदी ने म्यांमार में रह रहे प्रवासी भारतीयों को यंगून से संबोधित करते हुए कहा कि दोनों देशों के आपसी संबंध सदियों पुराने हैं। दोनों देशों की सभ्यताएं गंगा, कृष्णा, गोदावरी, ब्रह्मपुत्र और ईरावडी की गोद में विकसित हुई हैं।
      
पांच'बी'का उल्लेख
उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों में पांच'बी'का उल्लेख करते हुए कहा कि ये बुद्ध, बिजनेस, भरतनाट्यम, बालीवुड और बर्मा टीक हैं, लेकिन छठा महत्वपूर्ण'बी'- भरोसा है, जिस पर दोनों देशों के संबंध टिके हैं।
     
उन्होंने दोनों देशों के लोगों द्वारा पूजे जाने वाले देवी-देवताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि म्यांमार को ब्रह्मा का देश भी कहा जाता है। म्यांमार ने भारत में जन्मे बौद्ध धर्म को पाला पोसा है और इसे यहां के शिक्षकों और भिक्षुओं ने सहेजा है।

प्रधानमंत्री ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान म्यांमार आने वाले नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का इतिहास म्यांमार के उल्लेख के बिना पूरा नहीं होता है। इसके लिए उन्होंने महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, गुरुवर रवीन्द्रनाथ टैगोर और बहादुर शाह जफर का उल्लेख किया।      

'म्यांमार को लोकतांत्रिक अनुभव का लाभ दिया जा रहा है'
मोदी ने कहा कि भारत अपनी विकास यात्रा का अनुभव दूसरे देशों के साथ भी साझा करता है। म्यांमार को लोकतांत्रिक अनुभव का लाभ दिया जा रहा है। अफ्रीका, दक्षिण एशिया और विकासशील देशों को भी इन अनुभवों का फायदा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आपदा के समय भारत सबसे पहले पहुंचता है और वह'वसुधैव कुटुम्बकम'यानी 'पूरा विश्व एक परिवार' की परंपरा को मानता है और इसपर गर्व करता है।
      
उन्हों ने कहा कि 'सबका साथ, सबका विकास' का मंत्र एक देश तक सीमित नहीं है।

उन्होंने फिजी, नेपाल, श्रीलंका, मालदीव और म्यांमार को दी गयी मदद का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अच्छे पड़ोसी का कर्तव्य निभाता है। श्री मोदी ने पूवोर्त्तर राज्यों को पूवीर् एशिया का प्रवेश द्वार बताते हुए कहा कि यह म्यांमार में खुलता है। सरकार ने 16०० करोड़ रुपये की इम्फाल-मोरे सड़क परियोजना को मंजूरी दी है। इससे मणिपुर और म्यांमार के बीच आवागमन आसान हो जाएगा। उन्होंने यातायात गलियारे का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पूरे क्षेत्र का परिदृश्य बदलेगा।
     
प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को उल्लेख करते हुए कहा कि भारत से अपर म्यांमार में हाई स्पीड डीजल  की आपूर्ति शुरू हो चुकी है।


भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए कड़े और बड़े फैसले लिये : मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने देश को भ्रष्टाचार और काले धन से मुक्त करने के लिए'बड़े और कड़े'फैसले लिये हैं और पिछले तीन वर्ष में बदलाव के बड़े दौर की शुरूआत हुई तथा भारत की आवाज अब पूरी दुनिया में सुनी जा रही है।

मोदी ने भारतीय मूल के लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने देश की आजादी के पचहत्तर वर्ष  पूरे होने तक' न्यू इंडिया'बनाने का संकल्प लिया है और इसके लिए इसके लिए छोटे मोटे परिवर्तन नहीं बल्कि पूर्ण बदलाव में जुटी है।      

उन्होंने कहा कि सरकार ने देशहित में बड़े और कड़े फैसले लिए हैं और यह उसने बिना किसी संकोच या भय के किया है।  काले धन और भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने के लिए नोटबंदी और जीएसटी लागू करने फैसला लिया गया। मुट्ठी भर लोगों के भ्रष्टाचार की कीमत देश के सवा सौ करोड़ लोगों को चुकानी पड़ रही थी, जो हमें कतई मंजूर नहीं था। काले धन का कोई पता नहीं था लेकिन नोटबंदी के बाद लाखों ऐसे लोगों का पता चला है जिनके बैंक खातों में लाखों करोड़ों रुपये जमा हैं और वे कर नहीं दे रहे थे। उन्होंने कहा कि लाखों ऐसी कम्पनियों का पता चला है, जो काले धन को इधर उधर कर रही थीं और पिछले तीन माह के दौरान दो लाख से ज्यादा ऐसी कम्पनियों का पंजीकरण रद्द किया गया है और उनके खातों के संचालन पर रोक लगा दी गयी है।

प्रधानमंत्री ने व्यापार में पारदार्शिता लाने के लिए वस्तु एवं सेवा कर की चचार् करते हुए कहा कि इसे दो माह पहले लागू किया गया है और जो काम छह साल में नहीं हो सकता था, वह साठ दिन में हो गया है। इसके लागू होने के बाद से ईमानदारी से कारोबार करने की संस्कृति पैदा हुई है।

प्रधानमंत्री ने कहा,' हम गरीबी, आतंकवाद, साम्प्रदायिकता, जातिवाद तथा भ्रष्टाचार से मुक्त 'क्लीन इंडिया' बनाएंगे और बनाकर रहेंगे। उन्होंने म्यांमार में रह रहे प्रवासी भारतीयों से न्यू इंडिया वेबसाइट के जरिये इस महामिशन से जुड़ने की अपील की।

उन्होंने कहा कि देश तेजी से विकास कर रहा है और देशवासियों में यह भरोसा लौटा है कि भारत बदल सकता है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में भारत की आवाज सुनी जा रही है और भारत के प्रति एक आस्था जगी है।  भारत को सम्मान की दृष्टि से देखा जा रहा है और  दुनिया ने उसे'वैचारिक नेता'के रूप में पहचनाना शुरू किया है ।
           
मोदी ने सरकार की विभिन्न योजनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि उन्नीसवीं सदी की आधारभूत योजनाओं के आधार पर 21 सदी का ढांचागत विकास नहीं हो सकता है। इसके लिए सरकार को आधारभूत सुविधाओं के विकास में लगी है और दुनिया की सबसे बड़ा सौर ऊजार् परियोजना भारत में चलाई जा रही है। सड़कों, हवाई अड्डों आदि पर भारी निवेश किया जा रहा है, जो पहले कभी नहीं हुआ। किसानों की आय दोगुना करने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं और ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा जा रहा है।
            
प्रधानमंत्री ने कहा  कि भारत विकास का लाभ खुद तक ही सीमित नहीं रखना चाहता है बल्कि दूसरे देशों को भी देना चाहता है। उन्होंने कहा कि बांटकर खाने से आनन्द बढ़ जाता है। इस संदर्भ में उन्होंने अफ्रीका, दक्षिण एशिया और पैसिफिक आइलैंड के देशों के साथ किये जा रहे सहयोग का उल्लेख किया।

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