21 तोपों की सलामी के साथ एयरफोर्स मार्शल अर्जन सिंह को दी गई अंतिम विदाई

Updated on: 13 November, 2019 01:54 PM

भारतीय वायु सेना के मार्शल और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के नायक अर्जन सिंह का आज दिल्ली में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके सम्मान में आज दिल्ली सभी सरकारी इमारतों में राष्ट्रध्वज आधा झुका रहेगा। उनका अंतिम संस्कार सुबह 10 बजे किया गया। अर्जन सिंह वायुसेना के एकमात्र अधिकारी थे, जिन्हें फाइव स्टार रैंक प्रदान किया गया था। उनका 98 साल की उम्र में शनिवार को निधन हो गया। अर्जन सिंह का अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के लायलपुर में 15 अप्रैल 1919 को जन्म हुआ था।

लाइव अपडेट्स

10:10AM :  21 तोपों की सलामी के साथ अर्जन सिंह को दी जा रही अंतिम विदाई।

09: 45 AM: लाल कृष्ण आडवाणी भी अर्जन सिंह को श्रंद्धांजलि देने पहुंचे।

09: 25AM : पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी दी अर्जन सिंह को श्रद्धांजलि।

9.16AM: रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी श्रद्धांजलि

9.15AM: राजकीय सम्मान के साथ दी जा रही है अंतिम विदाई

9.00AM: बरार स्क्वायर पहुंचा एयरफोर्स के मार्शल अर्जन सिंह का पार्थिव शरीर

8.30 AM: सेना की गाड़ी में एयरफोर्स के मार्सल अर्जन सिंह का पार्थिव शरीर बरार स्क्वायर के लिए ले जाया गया

 

अर्जन सिंह का शनिवार शाम को दिल्ली के आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में निधन हो गया था। वह 98 वर्ष के थे और दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एक आधिकारिक सूचना के अनुसार दिल्ली के भवनों पर सोमवार को राष्ट्रध्वज आधा झुका रहेगा। एअर मार्शल का कल ही सुबह दस बजे राजकीय सम्मान के साथ बरार स्क्वैयर पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।

1965 के युद्घ के लिए मिला था फाइव स्टार रैंक
अर्जन सिंह 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय भारतीय वायु सेना के प्रमुख थे। उस युद्घ में भारत की जीत में वायु सेना और अर्जन सिंह का योगदान अतुलनीय था। जिसके लिए इन्हें फाइव स्टार रैंक दिया गया था। 44 साल की उम्र में ही अर्जन सिंह को भारतीय वायु सेना की कमान सौंप दी गई थी। वह स्विजरलैंड में भारत के राजदूत और केन्या में उच्चायुक्त पद पर भी रह चुके हैं। उन्हें 1965 के युद्ध में बेहतरीन नेतृत्व करने के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित भी किया गया है।

उन्हें 44 साल की आयु में ही भारतीय वायु सेना का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे उन्होंने शानदार तरीके से निभाया. साल 1965 की लड़ाई में जब भारतीय वायु सेना अग्रिम मोर्चे पर थी तब वह उसके प्रमुख थे। अलग-अलग तरह के 60 से भी ज्यादा विमान उड़ाने वाले सिंह ने भारतीय वायु सेना को दुनिया की सबसे शक्तिशाली वायु सेनाओं में से एक बनाने और विश्व में चौथी सबसे बड़ी वायु सेना बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।

1965 में पद्म विभूषण से सम्मानित

बहुत कम बोलने वाले व्यक्ति के तौर पर पहचाने जाने वाले सिंह ना केवल निडर लड़ाकू पायलट थे, बल्कि उनको हवाई शक्ति के बारे में गहन ज्ञान था जिसका वह हवाई अभियानों में व्यापक रूप से इस्तेमाल करते थे। उन्हें 1965 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। वह एक अगस्त 1964 से 15 जुलाई 1969 तक भारतीय वायुसेना के प्रमुख रहे।

स्विट्जरलैंड में भारत के राजदूत भी रहे

वायुसेना से सेवानिवृत्ति के बाद अर्जन सिंह को 1971 में स्विट्जरलैंड में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया।  इसके साथ ही उन्होंने वैटिकन में भी राजदूत के रूप में सेवा दी।  वह 1974 में केन्या में उच्चायुक्त भी रहे। वह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य तथा दिल्ली के उपराज्यपाल भी रहे। उन्हें जनवरी 2002 में वायुसेना का मार्शल बनाया गया था।

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