शिकंजा:खुफिया एजेंसी की रडार पर रोहिंग्या मुस्लिम,UP के 21 जिलों में बसे

Updated on: 22 April, 2019 06:28 AM

उत्तर प्रदेश में अवैध तौर पर रहने वाले रोहिंग्या शरणार्थी पुलिस और खुफिया एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं। प्रदेश में इन्हें चिन्हित करने का अभियान शुरू कर दिया गया है। डीजीपी मुख्यालय ने इसके लिए सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजा है। कहा गया है कि जहां भी रोहिंग्या रह रहे हैं, वहां सतर्कता बरती जाए।

पुलिस की खुफिया एजेंसियां इनके नाम और वर्तमान निवास के अलावा इनकी अन्य गतिविधियों, कामकाज और आवाजाही का भी पूरा ब्योरा तैयार करेंगी। केंद्र सरकार की रोहिंग्या के देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताने के बाद प्रदेश सरकार अलर्ट हो गई है। इसलिए इन्हें चिन्हित किया जा रहा है। पुलिस और खुफिया एजेंसियों को शक है कि इनमें से कुछ लोग अपराधों में शामिल हो सकते हैं। वहीं आतंकवादियों से भी कनेक्शन तलाशा जा रहा है। इसकी पूरी रिपोर्ट शासन और डीजीपी को भेजी जाएगी।

22 जिलों में फैले हैं रोहिंग्या

2012 से प्रदेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के आने का सिलसिला शुरू हुआ। बांग्लादेश से अवैध तरीके से सीमा पार कर देश में घुसे रोहिंग्या धीरे-धीरे प्रदेश के 22 जिलों में फैल गए। इनमें अधिकांश शहरों में छोटे-छोटे डेरे बनाकर रह रहे हैं। इनमें अधिकांश पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले हैं। हालांकि नेपाल सीमा के कई जिलों में भी इनके मौजूद होने के खुफिया इनपुट हैं। इस संबंध में स्थानीय पुलिस-प्रशासन को भी अलर्ट किया गया है।

कूड़ा बीनने वालों पर खास नजर

पुलिस और खुफिया एजेंसियों की नजर सबसे अधिक शहर की गली-मोहल्लों में कूड़ा बीनने वालों पर होगी। आशंका जाहिर की जा रही है कि बहुत बड़ी संख्या में रोहिंग्या शरणार्थी और बांग्लादेशी नागरिक इस काम में लगे हैं।

बैंकों और आधार बनाने वाली एजेंसियों को भी सतर्क किया
खुफिया एजेंसियों ने बैंकों के साथ-साथ आधार बनाने वाली एजेंसियों को भी सतर्क किया है। इसमें कहा गया है कि खाता खोलने की जल्दबाजी में अवैध रोहिंग्या के खाते न खुल जाएं। वहीं आधार बनाने वाली एजेंसियों को भी खास सतर्कता और जांच-पड़ताल करने के निर्देश दिए गए हैं।

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