ICSI : अर्थव्यवस्था में गिरावट का रोना रोने वालों को PM मोदी का जवाब,पढ़ें 10 खास बातें

Updated on: 16 September, 2019 02:53 AM

अपनी सरकार आर्थिक नीति की आलोचनाओं को सिरे से खारिज करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि चुनावी फायदे के लिये रेवड़ियां बांटने की बजाए उन्होंने सुधार एवं आम लोगों के सशक्तिकरण का कठिन रास्ता चुना है और वह अपने वर्तमान के लिये देश का भविष्य दांव पर नहीं लगा सकते। पढ़िए उनके संबोधन की 10 खास बातें-
 
1. द इंस्टीटयूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरिज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) के समारोह को संबोधित करते हुए बुधवार को पीएम मोदी ने कहा, राजनीति का स्वभाव मैं भलीभांति समझता हूं। चुनाव आए तो रेवड़ियां बांटो लेकिन रेवड़ियां बांटने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है क्या? प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को मजबूत बनाने का उन्होंने कठिन रास्ता चुना है जो सुधार और आम लोगों के सशक्तिकरण पर बल देने वाला है। इस मार्ग पर चलना कठिन है और मेरी आलोचना भी हो रही है। रेवड़ी बांटो तो जयकारा होता है। उन्होंने कहा कि हम देश के सामान्य नागरिकों के सशक्तिकरण पर जोर दे रहे हैं। मैं अपने वर्तमान की चिंता में देश के भविष्य को दांव पर नहीं लगा सकता।   

2. प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस सहित विपक्षी दलों एवं अपनी पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं द्वारा सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना का बिन्दुवार जवाब दिया और आंकड़ों के जरिये मनमोहन सिंह के नेतत्व वाली पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के आखिरी तीन वर्षों के कामकाज और अपनी सरकार के तीन वर्ष के कार्यों का ब्यौरा रखा ।

3. अर्थव्यवस्था की आलोचना करने वालों पर तीखा प्रहार करते हुए मोदी ने इसकी तुलना महाभारत के एक प्रमुख चरित्र और कौरव सेना के सेनापति कर्ण के सारथी  शैल्य  से की और कहा ऐसा करने वाले लोग निराशावादी हैं और शैल्य वत्ति से ग्रस्त हैं। शैल्य वत्ति से ग्रस्त लोगों को निराशा फैलाने में आनंद आता है। उन्होंने कहा, जब तक शैल्य वत्ति रहेगी तब तक  सत्यम बद  सार्थक कैसे होगा।
 
4. प्रधानमंत्री ने सवाल किया, देश में क्या पहली बार हुआ है जब जीडीपी की वद्धि दर 5.7 प्रतिशत हुई है। पिछली सरकार में 6 वर्षों में 8 बार ऐसे मौके आए जब विकास दर 5.7 प्रतिशत या उससे नीचे गिरी। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था ने ऐसे भी मौके देखे हैं जब विकास दर 0.1 प्रतिशत और 1.5 प्रतिशत तक गिरी थी। ऐसी गिरावट देश की अर्थव्यवस्था के लिये ज्यादा खतरनाक होती है। क्योंकि इस दौरान देश उच्च मुद्रा स्फीति, उच्च चालू खाते का घाटा और उच्च राजकोषीय घाटे से जूझ रहा था। 2014 से पहले के दो सालों में विकास दर औसतन 6 प्रतिशत के आसपास रही।

5. यह मानते हुए कि पिछली तिमाही में जीडीपी की विकास दर में कमी आई है, प्रधानमंत्री ने कहा कि वे देश की जनता को आश्वस्त करना चाहते हैं कि सरकार देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिये समय और संसाधनों का समुचित उपयोग कर रही है और हम पिछली तिमाही में गिरावट के क्रम को बदलने को प्रतिबद्य हैं।
 
6.  प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की बदलती हुई अर्थव्यवस्था में अब ईमानदारी को प्रीमियम मिलेगा और ईमानदारों के हितों की रक्षा की जाएगी।

7. उन्होंने कहा कि ये बात सही है कि पिछले तीन सालों में 7.5 प्रतिशत की औसत वद्धि दर हासिल करने के बाद इस वर्ष अप्रैल-जून की तिमाही में जीडीपी वद्धि दर में कमी दर्ज की गई। लेकिन ये बात भी उतनी ही सही है कि सरकार इस ट्रेंड को बदलने (रिवर्स) करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

8. अपने आलोचकों को कटरे में खडा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, एक वह भी दौर था जब अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की श्रेणी में भारत को नाजुक अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों एक ऐसे समूह  (फ्रेजाइल—5) में रखा गया था जो न केवल अपनी अर्थव्यवस्था के लिये खराब थे बल्कि दूसरे देश की अर्थव्यवस्था के लिये भी उन्हें खराब माना गया था।  उन्होंने कहा,  मेरे जैसे अर्थशास्त्र के कम जानकार को यह समझ नहीं आता है कि इतने बड़े बड़े अर्थशास्त्रियों के होते हुए ऐसा कैसे हो गया ।   

9. पिछले तीन वर्षों में 21 सेक्टरों से जुड़े 87 छोटे-बड़े रिफॉर्म किए गए हैं। डिफेंस सेक्टर, कंस्ट्रक्शन सेक्टर, फाइनैंशल सर्विसेज, फूड प्रोसेसिंग जैसे कितने ही सेक्टरों में निवेश के नियमों में बड़े बदलाव हुए हैं।

10. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार नीतियां और योजनाएं इस बात को ध्यान में रखकर बना रही है कि मध्यम वर्ग का बोझ कम हो और निम्न मध्यम वर्ग और गरीबों का सशक्तिकरण हो।

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