ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजा देवी का कोलकाता में निधन

Updated on: 20 October, 2019 12:29 PM

भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत में ठुमरी साम्राज्ञी के रूप में प्रख्यात पद्मविभूषण गिरिजा देवी का मंगलवार को कोलकाता के बिरला अस्पताल में रात करीब साढ़े नौ बजे निधन हो गया। सुबह तबीयत खराब होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 8 मई 1929 को बनारस में जन्मी गिरिजा देवी को 2016 में पद्मविभूषण  सम्मान से नवाजा गया था। गिरिजा देवी का अंतिम संस्कार बुधवार दोपहर वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। उनका शव दोपहर तक कोलकाता से विशेष विमान से लाया जाएगा।

गिरिजा देवी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक जताया है। पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत ने अपनी सबसे मधुर आवाजों में से एक को खो दिया है। मेरी संवेदनाएं गिरिजा देवी के प्रशंसकों के साथ हैं। उनकी आवाज कई पीढि़यों को प्रभावित करती थी। मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा है कि गिरिजा देवी ने ठुमरी गायन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके संगीत शिक्षण में उनके कई शिष्यों ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। अपने जीवन की अन्तिम अवस्था तक गिरिजा देवी संगीत साधना में लीन रहीं।

गिरिजा देवी की नतिनी अनन्या दत्ता के अनुसार मंगलवार की सुबह उन्होंने खूब बात की थी। फिर थोड़ी तबियत खराब होने की बात कही। उन्हें अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने जांच के बाद भर्ती कर लिया। देर शाम थोड़ा सुधार हुआ लेकिन रात करीब आठ बजे स्थिति नाजुक हो गयी। रात साढ़े नौ बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। बनारस घराने की सशक्त आवाज और संगीत की जीवंत मिसाल रहीं गिरिजा देवी काशी को संगीत का मुख्य केन्द्र बनाने की इच्छा रखती थीं।

उनकी वाणी में सरस्वती बसती थी : मालिनी अवस्थी
उनकी वाणी में सरस्वती का वास था। मेरी उनसे दीवाली के दिन बात हुई थी। उनका अगले दो माह का कार्यक्रम तय था। 27 अक्तूबर से उनका जयपुर उनका कार्यक्रम था। उसके बाद उनका पूना में भी कार्यक्रम तय था। बनारस उनके तन मन, वाणी और कर्म में बसता था। वह हमेशा कहती थीं कि बनारस की इस कला को जिंदा रखो। नई पीढ़ी के लिए वह एक जीती जागती मिसाल थीं। कला की वह शानदार साधक थी।  उनका संगीत अद्भुत था, वह किसी ईश्वरीय जादू की तरह था। 88 साल की उम्र में भी वह काफी उत्साह में रहती थीं। गायिका मालिनी अवस्थी कहती हैं कि वह जब भी दिल्ली आती थी, कभी होटल में नहीं ठहरी। हमेशा अपने शिष्य और शिष्याओं के पास ही रुकना पसंद करती थीं। इस साल भी वे एक बार मालिनी अवस्थी के घर तो दूसरी बार सुनन्दा शर्मा के घर रुकी थीं।

वह हमें गरीब कर गईं : जावेद अख्तर
गिरिजा देवी न केवल एक शास्त्रीय गायिका थी वरन देश के लिए एक धरोहर और नगीना थीं। उनके निधन ने हमें गरीब कर दिया।

गिरिजा देवी के निधन से पूर्वांचल ही नहीं देश की लोक कोकिला का कंठ मौन हो गया है लेकिन जैसा एक कवि ने कहा है 'आवाज की एक जगह है'। गिरिजा देवी की वह जगह हमेशा बनी रहेगी। गिरिजा देवी के आवाज में जो खनक थी वह आत्मा के तार को झंकृत कर देती थी। अंतत: वह स्त्री और पुरुष के आवाज से परे मनुष्य मात्र की आवाज थीं।
ज्ञानेंद्रपति, साहित्यकार

गिरिजा देवी बनारस घराने की अनमोल विरासत थीं। उन्होंने बनारस की गायकी को नया आयाम दिया। ठुमरी को नई पहचान दी। उनके गायन में हाव-भाव के मिश्रण ने जो माधुर्य पैदा होता था वह दुर्लभ है। उनके कमी दूर नहीं की जा सकती। उनका निधन अपूरणीय क्षति है।
डॉ.जितेंद्रनाथ मिश्र, साहित्यकार

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