निकाय चुनाव फ्लैशबैक: गोरखपुर ने देश को पहली किन्नर मेयर दिया था

Updated on: 15 October, 2019 12:55 PM

ऐतिहासिक और क्रांतिकारी गोरखपुर हमेशा से समय-समय पर राजनीतिक परिवर्तनों का भी गवाह बना है। स्थानीय निकाय चुनाव की रणभेरी बजने के साथ ही एक बार फिर सभी राजनीतिक दल और दावेदार जोर आजमाइश को तैयार है। लेकिन यहां एक चुनाव ऐसा भी था जब सभी राजनीतिक दलों और दावेदारों को पछाड़ते हुए गोरखपुर की जनता ने देश को पहली किन्नर मेयर से रूबरू कराया।

फिर जब वो रिक्शे पर लालबत्ती लगाकर चलने का एलान करने लगीं तो देश भर में गोरखपुर और गोरखपुर वालों के इस जनादेश की चर्चा आम हो गई। मजाक-मजाक में शुरू हुये एक चुनावी प्रयोग का अंजाम ये होगा किसी ने सोचा नहीं था। 2001 के निकाय चुनाव में गोरखपुर मेयर की सीट महिला के लिए आरक्षित थी। सपा के टिकट पर अंजू चौधरी और भाजपा से विद्यावती भारती मैदान में थीं। सूबे में भाजपा की सरकार थी।

बताते हैं कि किन्नर आशा देवी के चुनाव लड़ने में शहर के एक चिकित्सक और दो पत्रकारों  की भूमिका थी। राजनीतिक नेताओं से जनता की नाराजगी को हवा देते हुए प्रतीक के तौर पर आशा देवी को मैदान में उतारा गया। शुरू-शुरू में किसी ने इसे गम्भीरता से नहीं लिया लेकिन धीरे-धीरे हवा चली तो जमे-जमाये राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के लिए टिकना मुश्किल हो गया।

आशा के प्रचार में मध्य प्रदेश से देश की पहली किन्नर विधायक शबनम मौसी भी आईं। तब रेलवे स्टेशन से नगर निगम तक भारी भीड़ जुटी और राजनीतिक पंडितों ने जनता का रुख भांपकर भविष्यवाणियां करनी शुरू कर दीं। आशा देवी राजनीतिक दलों से लोगों की निराशा और गुस्से का प्रतीक बन गई थीं। उनके प्रति मतदाताओं की सहानुभूति बढ़ती ही जा रही थी।

फिर जब चुनावी नतीजे आये तो सब हैरान रह गये। सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। आशा देवी ने सपा की अंजू चौधरी को करीब 60 हजार वोटों से हरा दिया था। चुनाव जीतने के बाद आशा देवी ने जनभावनाओं का ख्याल करते हुए सादगी की मिसाल पेश करने की कोशिश की। उन्होंने मेयर की कार की बजाये रिक्शा से चलने का एलान किया। उनके शपथ ग्रहण के दिन लालबत्ती लगा रिक्शा नगर निगम पहुंचा भी लेकिन अधिकारियों के समझाने-बुझाने के बाद वह उस पर नहीं बैठीं, न ही उस दिन लालबत्ती लगी सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल किया। कार्यकाल खत्म होने के बाद वह सक्रिय राजनीति में नहीं रहीं। लम्बी बीमारी के बाद जून 2013 में उनका निधन हो गया। 

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