दिल्ली में ऑड-इवन: एनजीटी ने सरकार से पूछा टू-व्हीलर को क्यों रखा दायरे से बाहर

Updated on: 20 July, 2019 01:41 PM

दिल्ली सरकार की ओर से 13 नवंबर से 17 नवंबर तक ऑड इवन फॉर्मूला लागू करने का ऐलान कर दिया है। वहीं उसके इस ऐलान पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की नजरें तिरछी हो गई हैं। शनिवार को एनजीटी में इस मुद्दे पर सुनवाई शुरू हो गई है। शुक्रवार को एनजीटी ने सरकार से जो सवाल किए हैं उसके बाद अब इस स्कीम को लेकर अनिश्चितिता बनगई है। एनजीटी अब शनिवार को इस मामले पर सुनवाई एनजीटी ने दिल्ली सरकार से पूछा था कि वह यह बताए कि उसने राजधानी में अगले हफ्ते ऑड इवन स्कीम का ऐलान क्यों किया जबकि कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इसके बाद भी प्रदूषण कम होने की संभावना नहीं है।

एनजीटी का कड़ा रुख
एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस स्वतंत्र कुमार इस मामले का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके अलावा वकील तरुणवीर खेहर दिल्ली सरकार की ओर से पैरवी कर रहे हैं। एनजीटी ने दिल्ली सरकार से उसे वह चिट्ठी दिखाने को कहा है जिसके आधार पर ऑड इवन के लागू करने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा सरकार से इस मुद्दे पर उपराज्यपाल की मंजूरी दिखाने को कहा गया है। एनजीटी ने दिल्ली सरकार से यह भी पूछा है कि एक व्यक्ति एक दिन में कितनी बार सांस लेता है। एनजीटी ने दिल्ली सरकार से पूछा कि टू व्हीलर को स्कीम से क्यों बाहर रखा गया है और इनसे निकलने वाले धुएं का क्या असर होगा और साथ ही क्या सरकार इस ऑड इवन स्कीम को प्रदूषण बढ़ने पर लागू करने की मंशा रखती है? इस पर सरकार ने कहा कि इस समय वह इसका जवाब नहीं दे सकती है। वहीं सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने एनजीटी में कहा है कि अगले दो दिनों में बारिश हो सकती है।

सरकार से सख्त सवाल

एनजीटी ने सरकार से यह सवाल भी किया कि सरकार ने जो 4 गुना पार्किंग फीस बढ़ा दी है आपने सोंचा है कि आप लोगों पर कितना भार डाल रहे हैं। इसी वजह से लोग पार्किंग में नहीं खड़े करते बल्कि सड़को पर खड़ी कर देते हैं।  4 गुना फीस बढ़ाने का फायदा तो पार्किंग वालों को ही मिलेगा। इस मामले की सुनवाई कर रही बेंच ने सरकार से सवाल किया, 'कौन से आंकड़ों के आधार पर सिर्फ पांच दिन के लिए ऑड इवन स्कीम को लागू करने का फैसला लिया गया जबकि अब प्रदूषण कम हो रहा है जैसा कि प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड की रिपोर्ट्स में कहा गया है।' एनजीटी ने दिल्ली सरकार से पूछा कि क्या ऑड-ईवन योजना से प्रदूषण घटा है, अगर नहीं तो फिर एनजीटी इस योजना पर रोक लगा देगी। इस मामले पर शनिवार को भी सुनवाई जारी रहेगी। एनजीटी ने कहा कि दिल्ली सरकार ने प्रदूषण रोकने के लिए समय रहते पर्याप्त कदम नहीं उठाए। एनजीटी ने यह भी पूछा कि दिल्ली सरकार ने कंस्ट्रक्शन डस्ट की वजह से प्रदूषण रोकने के लिए क्या किया? उसने पूछा कि सरकार बताए कि नियमों का उल्लंघन करनेवाले बिल्डरों पर क्या कार्रवाई की गई?

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