कानपुरः पूर्व प्रिंसिपल की हत्या में अाईएस का हाथ, जांच एनआईए को

Updated on: 19 August, 2019 01:26 AM

पूर्व प्रिंसिपल रमेश शुक्ला की हत्याकांड की जांच एनआईए को सौंप दी गई है। गृह मंत्रालय ने इसकी हरी झंडी दे दी है। हत्याकांड में आतंकी हाथ होने का राज लखनऊ में सैफुल्लाह के एनकाउंटर के बाद खुला था। एनकाउंटर के बाद भोपाल से हाथ लगे सैफुल्लाह के साथियों ने एटीएस को हत्या की वजह बताई थी। छानबीन में यह बात आई थी कि आकाओं को भरोसा दिलाने के लिए संदिग्ध आईएसआईएस आतंकियों ने पूर्व प्रिसिंपल को मारा था। उन लोगों ने नई खरीदी पिस्टल की टेस्टिंग हत्या से की थी। इस वारदात की सूचना आतंकियों ने आकाओं को भी दी थी।
विष्णुपुरी निवासी रमेश शुक्ला जाजमऊ के प्यौंदी गांव स्थित स्वामी आत्मप्रकाश ब्रह्मारी जूनियर हाईस्कूल में प्रिंसिपल थे। रिटायरमेंट के बाद भी वह स्कूल में पढ़ाते थे। रमेश शुक्ला की हत्या 24 अक्तूबर को पीछे से गोली मार कर की गई थी। उनका शव बरामद कर पुलिस छानबीन कर रही थी। मार्च में सैफुल्लाह का एनकाउंटर होने के बाद हुई धरपकड़ में एटीएस के हाथ मध्य प्रदेश से आतिक और दानिश लगे तो रमेश शुक्ला हत्याकांड का राज खुला। आईएसआईएस की गतिविधियों में लिप्त होने के संदेह में पकड़े गए शातिरों ने एटीएस को बताया कि उन लोगों ने ही पूर्व प्रिंसिपल की हत्या की थी। इस दौरान ही जांच एनआईए को देने का फैसला लिया गया। अब गृहमंत्रालय को एनआईए को मामले की जांच की हरी झंडी मिल गई, जिसके बाद एनआईए ने नए सिरे से जांच-पड़ताल शुरू कर दी है।
गंगा किनारे करते थे अभ्यास 
पकड़े गए आतंकियों ने पूछताछ में यह भी बताया था कि गंगा किनारे अभ्यास करते थे। उन लोगों को आकाओं को भरोसा दिलाना था कि जेहाद के नाम पर कुछ भी कर सकते हैं। भरोसा दिलाने के लिए हथियार जुटाए जा रहे थे। प्रिसिंपल तिलक लगाते थे। तिलक देखकर उन्होंने लाइव फायर टेस्टिंग के लिए उन्हें ही निशाना बनाया। आतंकियों को लगा था कि तिलकधारी को मारने से उनका आका उन्हें जेहादी समझ कर खुश होगा।
ट्रेन में हुए विस्फोट के भी हैं जिम्मेदार!
एनआईए ने सूत्रों कहा कि आईएसआईएस से जुड़े संदिग्ध आतंकियों का हाथ भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में हुए विस्फोट भी रहने का अंदेशा है। अपने फायरिंग कौशल की जांच के लिए पूर्व प्रिंसिपल की हत्या की थी।

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