वासेनर का सदस्य बना भारत, एनएसजी में सदस्यता का दावा और हुआ मजबूत

Updated on: 21 September, 2019 06:56 AM

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा उत्कृष्ट निर्यात नियंत्रण व्यवस्था देखनेवाली संस्था वासेनर आरेंजमेंट (डब्ल्यूए) ने गुरुवार को भारत को अपना नया सदस्य बनाया है।

भारत के वासेनर अरेंजमेंट का 42वां सदस्य बनने से अप्रसार क्षेत्र में देश का कद बढ़ने के साथ महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को हासिल करने में भी मदद मिलेगी। साथ ही, परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) के शामिल किए जाने का दावा मजबूत होगा। वासेनार का सदस्य बनने के बाद जहां एक तरफ भारत को महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी मिल पाएगी तो वहीं दूसरी तरफ परमाणु अप्रसार के क्षेत्र में एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं करने के बावजूद नई दिल्ली का रुतबा भी बढ़ेगा।

भारत को वासेनर में शामिल करने का फैसला विएना में चली दो दिनों की बैठक में लिया गया है। इससे परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) पर भारत का दावा और भी मजबूत होगा। इसके सदस्य देशों के बीच हथियारों के हस्तांतरण में पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जाता है। चीन इस संस्था का सदस्य नहीं है, फिर भी उसने अड़चन डालने की भरसक कोशिश की।

एक जारी बयान में कहा गया- “वासेनर आरेंजमेंट में शामल देशों ने सदस्यों के लिए आए आवेदनों की समीक्षा की और भारत को 42वें सदस्य देश के तौर पर शामिल करने पर सहमति बनी। जैसे ही इस दिशा में जरुरी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी भारत वासेनर का सदस्य बन जाएगा।”

गौरतलब है कि पिछले साल जून में भारत को मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) की पूर्णकालिक सदस्यता दी गई थी। अमेरिका के साथ परमाणु करार होने के बाद से लगातार भारत इसकी निर्यात नियंत्रण संस्था से जुड़ना चाह रहा है, जैसे- एनएसजी, एमटीसीआर, ऑस्ट्रेलिया ग्रुप, वासेनर। ये सभी  परमाणु, जैविक और रासायनिक हथियार और प्रोद्यौगिकी को रेगुलेट करता है।

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