शिकंजा: CBI के रडार पर UP के 2488 पीसीएस अफसर

Updated on: 14 December, 2019 04:45 PM

प्रदेश के 2488 पीसीएस अफसर सीबीआई के रडार पर होंगे। यह वे अफसर हैं जिनका चयन सपा शासनकाल के दौरान हुई लोक सेवा आयोग की पीसीएस 2011 से 2015 तक की पांच भर्तियों में किया गया। सीबीआई इन भर्तियों में चयनित अफसरों से भी पूछताछ कर सकती है।

पीसीएस 2011 से 2015 तक की परीक्षाओं में चयनित 2488 अफसरों में 184 डिप्टी कलेक्टर यानी एसडीएम और 200 डिप्टी एसपी शामिल हैं। ये चयनित अफसर प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात हैं। यूं तो सीबीआई एक अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2017 के बीच हुई आयोग की सभी भर्तियों की जांच करेगी पर इसमें पीसीएस परीक्षा सबसे अहम होगी क्योंकि सबसे ज्यादा विवाद पीसीएस भर्ती को लेकर ही रहा। सूबे में प्रशासनिक सेवा की यह सर्वोच्च भर्ती होती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर भर्तियों की सीबीआई जांच शुरू हो गई है। इसके बाद से ही पीसीएस में चयनित इन 2488 अफसरों समेत अप्रैल 2012 से मार्च 2017 के बीच आयोग की विभिन्न भर्तियों में चयनित सभी अभ्यर्थियों की बेचैनी बढ़ गई है।

आयोग में खुल सकता है दफ्तर

माना जा रहा है कि केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय से सीबीआई जांच की अधिसूचना जारी होने के बाद अब सीबीआई की सक्रियता तेजी से बढ़ेगी। सीबीआई लोक सेवा आयोग दफ्तर में कैंप कर अपना एक अस्थायी दफ्तर भी खोल सकती है क्योंकि उसे जांच के लिए सभी जरूरी दस्तावेज यहीं से प्राप्त होंगे। सूत्रों की मानें तो सीबीआई ने भर्तियों के भ्रष्टाचार से जुड़े साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि आयोग के अफसरों का कहना है कि उन्हें अब तक सीबीआई जांच के संबंध किसी भी प्रकार की अधिकृत जानकारी नहीं मिली है पर प्रदेश के गृह विभाग के सचिव भगवान स्वरूप ने सीबीआई जांच की अधिसूचना जारी होने की पुष्टि की है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय ने सपा शासनकाल के दौरान आयोग की प्रमुख भर्तियों में शामिल रहे पदों और विवाद की वजह का ब्योरा तैयार किया है। बकौल अवनीश वह यह ब्योरा सीबीआई को सौपेंगे।

पीसीएस भर्तियों पर विवाद

पीसीएस 2011-त्रिस्तरीय आरक्षण तथा जाति विशेष को स्केलिंक में अधिक अंक देने के कारण विवादों में रही।

पीसीएस 2012-सेंटर आवंटन में मनमानी, मार्कशीट की गोपनीयता और गलत प्रश्नों की वजह से विवाद हुआ।

पीसीएस 2013-कॉपियों का सही मूल्यांकन न होने, परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों के गलत उत्तर की वजह से विवाद हुआ।

पीसीएस 2014- परिणाम केवल अनुक्रमांक के आधार पर घोषित किए जाने के कारण विवाद हुआ क्योंकि आयोग के इतिहास में ऐसा पहला मौका था जब अंतिम परिणाम में सफल अभ्यर्थियों के नाम का उल्लेख नहीं था। आरोप है कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि यह ज्ञात न हो सके कि चयनित होने वाले अभ्यर्थी किस जाति के हैं। पीसीएस 2015- प्रारंभिक परीक्षा का पेपर आउट कराने से लेकर मुख्य परीक्षा की कॉपी बदलने तक का मामला सामने आया। प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के परिणाम भी जल्दबाजी में घोषित किए गए थे।

पीसीएस

भर्ती वर्ष पदों की संख्या

2011 389

2012 345

2013 654

2014 579

2015 521

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