संसद अटैक: तीन आतंकियों को गोली से छलनी करनेवाले कांस्टेबल संतोष की जुबानी

Updated on: 13 November, 2019 11:33 AM

कांस्टेबल संतोष कुमार के लिए 9 फरवरी 2013 का दिन सामान्य दिनों की तरह था। वे अपनी रुटीन ड्यूटी पर थे कि अचानक संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी देने की ख़बर चारों तरफ जोर से फैलने लगी। सीआरपीएफ में असस्टेंट सब इंस्पेक्टर ने एक अंग्रेजी वेबसाइट से बात करते हुए बताया कि उन्हें उनके दोस्त ने सुबह 9 बजे इस बात की जानकारी दी और टेलीविज़न चैनल देखने के लिए कहा। जैसे ही टेलीविज़न चैनल की स्क्रीन पर न्यूज़ को फ्लैश होते देखा आवाक रह गया। बोलने को शब्द नहीं थे।

अचानक संतोष का दिल भी उसी तरह से धड़कने लगा जैसा 13 दिसंबर 2001 को हुआ था जब वे गेट नंबर 6 जिसे पार्लियामेंट के आयरन गेट नाम से भी जाना जाता है वहां संतोष ने ने तीन आतंकियों को ढेर किया था।

नीमाज के सीआरपीएफ एकेडमी से ट्रेनिंग लेकर आए कांस्टेबल संतोष 23 बटालियन का हिस्सा थे और संसद भवन की पहरेदारी में तैनात थे। उन्हें अपनी पुरानी यादों को ताज़ा करते बताया- मैरी ड्यूटी सुबह 11 बजे से 1 बजे तक थी। करीब 11 बजकर 40 मिनट पर बेहद कम दूरी से फायरिंग की आवाज़ सुनाई दी।

उसके फौरन बाद एक जोरदार धमाका हुआ। पांच आतंकी संसद भवन परिसर में धावा बोल चुके थे। जिनमें से एक मानव बम था जिसने सुरक्षा बलों की घेराबंदी में खुद को उड़ा लिया। संतोष ने बताया कि बाकी बचे हुए अन्य आंतकी संसद भवन की बाहरी दीवार का सहारा ले रहे थे और मेन हॉल की तरफ घुसने की कोशिश कर रहे थे।

संतोष ने अपने सीनियर इंस्पेक्टर मोहन प्रकाश के साथ पेड़ की आड़ लेते हुए पहले अपनी बंदूक (एसएलआर) को चेक किया और दो राउंड मैग्जीन (करीब 40 राउंड) उनके पास मौजूद था। संतोष ने बताया-  “आतंकी मुझे देख पाते हालांकि मैं भी पूरी तरह से उन लोगो को नहीं देख रहा था फिर भी मैं उन लोगों की छाती और पेट देख पा रहा था और मुझे पता था कि किया करना है।”

संतोष ने अपने बंदूक को रीलोड करने के फौरन बाद चार में दो आंतकियों को सफलतापूर्वक वहीं पर मार गिराया। अपने सिर के ऊपर से गुजरी एक बंदूक की गोली को याद करते हुए संतोष ने बताया- “तीसरे आंतकी को मेरी लोकेशन का पता लग गया उसने एके-47 से मेरे ऊपर फायर कर दी। लेकिन, उसी वक्त मेरी तरफ से दागी गई बुलेट ने उसे छलनी कर दिया।”        

संतोष ने गर्व की अनुभूति के साथ कहा- चौथा आतंकी पार्लियामेंट गेट की तरफ भागा। हमारे कुछ साथी पहले से ही वहां मौजूद थे जिन्होंने अगले तीन मिनट के अंदर ही उसे ढेर कर दिया। उत्तर प्रदेश से आनेवाले कांस्टेबल संतोष उसके पहली ही पोस्टिंग के लिए सबसे बड़े अवॉर्ड शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।   

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