बीआरडी मेडिकल कालेज: आग की लपटों में पहले राख हो चुके हैं घोटाले के सबूत

Updated on: 22 April, 2019 06:30 AM

केस एक- वाकया 2003 का है। जिले में फर्जी लाईसेंस जारी होने का बड़ा रैकेट सामने आया। दूसरे प्रांतों से लाई गई कुछ गाड़ियों के फर्जी कागज भी सामने आए। शक आरटीओ दफ्तर के कुछ कर्मचारियों पर पहुंचा। शासन ने घोटाले की जांच के लिए आदेश दिया। इसी बीच 17 जुलाई 2003 को आरटीओ के रिकार्ड रूम में आग लगी और घोटाले के सभी सबूत खाक हो गए।

केस दो- गोरखपुर विश्वविद्यालय में फर्जी मार्कशीट जारी होने का कई बार मामला सामने आया। विवाद बढ़ने पर हर बार रिकार्ड रूम में आग लग गई। वर्ष 1987 में पहली बार रिकार्ड रूम में आग लगी। उस समय फेल छात्रों को पास करने का आरोप कुछ कर्मचारियों पर लगा। इसके 10 साल बाद दोबारा रिकार्ड रूम में आग लगी। उस दौरान कई कालेजों से बीएड का फर्जी मार्कशीट जारी होने का मामला सामने आया था। इसके अलावा एक बार रिकार्ड रूम में चोरी भी हो चुकी है।

यह दो मामले बानगी हैं। जिले में घोटाले और आग का चोली दामन का रिश्ता रहा है। जिन विभागों में घोटाले हुए वहां जांच के आदेश होने पर आग भी जरूर लगी है। आग की लपटों में घोटालों के सबूत स्वाहा गए। घोटालों के जांच के आदेश आदेश भी उसी आग में झुलस गए। ताजा मामला बीआरडी मेडिकल कालेज का है। सोमवार को  बीआरडी में लगी आग को लोग इसी नजरिये से देख रहे हैं।

ऑक्सीजन त्रासदी की चल रही है जांच
बीआरडी मेडिकल कालेज में सबसे बड़ा मामला वार्ड में लिक्विड ऑक्सीजन सप्लाई ठप होने का है। बीते 10 व 11 अगस्त को वार्ड में ऑक्सीजन आपूर्ति ठप होने के बाद 30 बच्चों समेत 42 मरीजों की मौत हो गई। इस मामले में पूर्व प्राचार्य समेत नौ लोग गिरफ्तार हुए हैं। मामले की जांच अब तक चल रही है।

दवा खरीद घोटालों की होनी है जांच
ऑक्सीजन त्रासदी के बाद बीआरडी में एक के बाद एक कई घोटाले सामने आने लगे। ऑक्सीजन त्रासदी के बाद बीआरडी पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने दवा खरीद में घोटाले के आरोप लगे। जिसके बाद सीएम ने तीन वर्ष के दवा खरीद की सीएजी से जांच कराने का आदेश दिया।

लिक्विड ऑक्सीजन के टेंडर की होनी है जांच
ऑक्सीजन त्रासदी की जांच कर रही पुलिस ने लिक्विड ऑक्सीजन के टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका जताई। अदालत को जांच सौंपे रिपोर्ट में भी पुलिस ने इसका उल्लेख किया। जिसके बाद इसकी भी जांच शुरू हो गई है।

ठेके पर संविदा कर्मचारियों की भर्ती की हो रही जांच
बीआरडी में बड़ी संख्या में ठेके पर कर्मचारियों की भर्ती की गई। इसके अलावा एनएचएम में भी संविदा कर्मचारी भर्ती किए गए। इसमें मानकों को दरकिनार किया गया। ऑक्सीजन त्रासदी के बाद बीआरडी पहुंचे डीजीएमई डॉ. केके गुप्ता ने इसके जांच के आदेश दिए थे।

मरम्मत के नाम हुए गोलमाल की होनी हैं जांच
कॉलेज में मरम्मत के नाम पर बड़ा खेल हुआ। चहेते ठेकेदारों को मनमाने रेट पर काम दिया गया। ठेकेदारों ने एनएचएम घोटाले की तर्ज पर आधा-अधूरा काम कराकर पूरा भुगतान ले लिया। निवर्तमान प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने इस मामले की जांच कराने का फैसला किया था।
हादसा या साजिश, असमंजस में हैं प्राचार्य
बीआरडी के नवागत प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार इस हादसे के बाद हतप्रभ हैं। वह समझ नहीं पा रहे हैं कि यह हादसा है साजिश। उन्होंने कहा कि इस घटना में साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके सभी पहलूओं की पड़ताल कराई जा रही है।

पांच सदस्यीय कमेटी करेगी जांच
बीआरडी में आग की घटना की कालेज प्रशासन ने आंतरिक जांच शुरू करा दी है। वित्त नियंत्रक विरेन्द्र कुमार चौबे की अगुआई में पांच सदस्यीय समिति को जांच सौंपी गई है। समिति में एसआईसी डॉ. आरएस शुक्ला, सोमवार को प्रभारी प्राचार्य रहे डॉ. राम कुमार जायसवाल, अनुरक्षण अधिकारी डॉ. मनोज यादव और अवर अभियंता बलबीर राम शामिल हैं। यह जानकारी प्राचार्य ने दी। उन्होंने बताया कि यह समिति घटना के सभी पहलूओं की जांच करेगी। समिति घटना में हुए नुकसान का आंकलन कर तीन दिन में रिपोर्ट देगी।

शासन को भेजी गई रिपोर्ट
बीआरडी में आग की घटना को शासन ने गंभीरता से लिया। महानिदेशक चिकित्सा-शिक्षा(डीजीएमई) ने इस मामले में प्राचार्य से प्रारंभिक रिपोर्ट तलब की है। मंगलवार को रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। रिपोर्ट में घटना के कारणों का उल्लेख नहीं है।
जले प्राचार्य कक्ष में बंद हुआ प्रवेश
कालेज प्रशासन ने इस हादसे में जले तीनों को कमरों को एक तरह से सील कर दिया है। कमरों में किसी के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। इसके लिए चार-चार सुरक्षाकर्मियों की तीन शिफ्ट में तैनाती की गई है। इसके अलावा फाइलों से भरी चारों आलमारियों को भी सील-बंद जैसा ही किया गया है। कमरे की विडियोग्राफी कराई गई है। खबर है कि जांच कमेटी के सदस्यों को ही कमरे में जाने की अनुमति हैं। समिति ने मंगलवार से जांच शुरू कर दी है। जले हुए तीन कमरों के अलावा गैलरी के हिस्से में मंगलवार को सफाई शुरू हो गई। आधा दज्रन कर्मचारियों को इस काम में लगाया गया है।

एनॉटमी विभाग बना अस्थाई प्राचार्य कक्ष
कालेज का एनॉटमी विभाग अब अस्थाई प्राचार्य कार्यालय बन गया है। प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार मंगलवार को दिन भर एनॉटमी विभाग में ही बैठे रहे। उनके साथ व्यक्तिगत सहायक शोभा शेखर भी मौजूद रहीं। विभाग के हॉल में प्राचार्य ने शिक्षकों के साथ बैठक की। यह बैठक करीब दो घंटे चली इस दौरान प्राचार्य ने शिक्षकों से विभागवार योजनाओं का ब्योरा लिया।
परिसर में घूम-घूम कर प्राचार्य ने ऑफ कराया स्वीच
सोमवार को हुई घटना के बाद कालेज प्रशासन के अधिकारी सकते में आ गए हैं। प्राचार्य कक्ष में आग लगने की एक वजह शार्ट सर्किट भी हो सकती है। इसके मद्देनजर मंगलवार को प्राचार्य खुद परिसर में घूम-घूम कर बिजली के उपकरणों का स्वीच ऑफ करा रहे थे। उन्होंने वित्त नियंत्रक के कमरे का स्वीच खुद ऑफ किया।

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