गार्ड ऑफ ऑनर के बाद राजघाट पहुंचे नेतन्याहू

Updated on: 16 November, 2019 08:20 AM

भारत के छह दिवसीय दौरे पर रविवार को राजधानी दिल्ली पहुंचे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू आज कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे। दौरे के दूसरे दिन दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। साथ ही इजरायली पीएम भारत-इजरायल सीईओ फोरम से मिलेंगे। इससे पहले दौरे के दूसरे दिन बेंजामिन नेतन्याहू का राष्ट्रपति भवन में सम्मान किया गया। पीएम नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में स्वागत किया। नेतन्याहू ने इसके बाद गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। पीएम मोदी ने इजरायली पीएम और उनकी पत्नी को राष्ट्रपति भवन में मौजूद अधिकारियों और मंत्रियों से मिलवाया। नेतन्याहू ने भी पीएम मोदी को इजरायली प्रतिनिधियों से मिलवाया।

पीएम मोदी की तारीफ
राष्ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत और विदेश राज्य मंत्री भी मौजूद रहे। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद बेंजामिन ने पीएम मोदी की तारीफ की। इस दौरान उन्होंने कहा कि शांति और खुशहाली के लिए दोनों देशों की साझेदारी अहम है। नेतन्याहू ने कहा, 'पीएम मोदी के इजरायल के ऐतिहासिक दौरे से दोस्ती का ये सिलसिला शुरू हुआ, जिसने जबरदस्त उत्साह पैदा किया। मेरी यात्रा के साथ ये जारी रहेगा। ये यात्रा मेरी पत्नी और मेरे साथ इजरायलवासियों के लिए काफी अहम है।'

यरूशलम पर वोट से फर्क नहीं
बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत-इजरायल संबंधों को 'स्वर्ग में बनी जोड़ी' जैसा करार देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र में यरूशलम मुद्दे पर भारत द्वारा इजरायल के खिलाफ वोट किए जाने से उनके देश को 'निराशा' हुई लेकिन इससे दोनों देशों के संबंधों पर फर्क नहीं पड़ेगा। नेतन्याहू ने कहा, 'हां, स्वाभाविक तौर पर हम निराश हुए, लेकिन यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि हमारे रिश्ते कई मोर्चों पर आगे बढ़ रहे हैं।' इससे पहले नेतन्याहू ने दौरे के पहले दिन दिल्ली में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात की थी। साथ ही एयरपोर्ट उतरने के बाद वो सबसे पहले तीन मूर्ति चौक गए थे और हाइफा युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी थी। इस चौक का नाम बदलकर अब तीन मूर्ति हाइफा चौक किया गया है।

सीईओ फोरम की मीटिंग
दोनों देशों के सीईओ फोरम की मीटिंग में इजरायल के टॉप हथियार बनाने वाली कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सूत्रों के मुताबिक, आज दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि पानी, कृषि, तकनीकी, आईटी और एनर्जी से जुड़े 10 एमओयू साइन हो सकते हैं।

ये है पूरे दिन का कार्यक्रम

दोपहर 12 बजे- हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी से नेतन्याहू की मुलाकात

दोपहर 12.30 बजे- डेलीगेशन स्तर की बातचीत

दोपहर 1 बजे- समझौतों पर हस्ताक्षर और मीडिया ब्रीफिंग

शाम 5.45- राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात

शाम 7 बजे- होटल ताज डिप्लोमेटिक में भारत-इजरायल सीईओ फोरम के साथ मीटिंग

शाम 7.30 बजे- भारत-इजरायल बिजनेस समिट

आपसी समझ बढ़ेगी
पूर्व विदेश सचिव शशांक ने कहा कि नेतन्याहू का दौरा भारत और इजरायल दोनों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और यादगार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस गर्मजोशी से नेतन्याहू का स्वागत किया है ये दोनों देशों की बढ़ती समझ का संकेत है। पीएम मोदी को भी इजरायल यात्रा के दौरान इसी तरह का गर्मजोशी भरा स्वागत मिला था।
पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि नेतन्याहू की यात्रा ऐसे समय मे हो रही है जब दुनिया में कई तरह के घटनाक्रम हुए हैं। इजरायल की राजधानी के रूप में यरुशलम को मान्यता देने के अमेरिकी प्रस्ताव का भारत ने विरोध किया है। शशांक ने कहा कि इजरायल जानता है कि भारत के रिश्ते फलस्तीन के अलावा मध्य एशिया व अरब देशों के साथ भी अच्छे हैं। उसने भारत की रणनीतिक जरूरतों और विचारों का सम्मान करते हुए आपसी रिश्तों की मजबूती पर जोर दिया है। ये समझ मौजूदा यात्रा से और मजबूत होगी।
आपसी रिश्तों को स्वतंत्र रूप से देखता है भारत
भारत इजरायल के साथ रिश्तों को स्वतंत्र रूप से देखता है लेकिन अरब देशों में रहने वाले करीब 60 लाख भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही रणनीतिक भागीदारी को आगे बढ़ाया जा सकता है।

रक्षा सहयोग बढ़ेगा
पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि रक्षा व सैन्य छेत्र में भारत व इजरायल के सहयोग नेतन्याहू की यात्रा से नई ऊंचाइयों को छुएगा। इजरायल भारत को कई महत्वपूर्ण तकनीकी हस्तांतरण को तैयार है। उन्होंने कहा जब जब भारत को रक्षा क्षेत्र में सहयोग की जरूरत हुई है इजरायल ने कदम आगे बढ़ाकर सहयोग किया है। इजरायल भारत को रक्षा क्षेत्र में नए उपकरण देने और नई तकनीकी साझा करने को तैयार होगा। वह भारत के मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट से भी जुड़ने को तैयार दिखता है।
आतंकवाद पर कड़ा रुख
शशांक के मुताबिक दोनों देश आतंकवाद से पीड़ित हैं। इसलिए आतंकवाद पर इनका कड़ा रुख और आतंकरोधी सहयोग बढ़ाने का मसौदा वार्ता की मेज पर जरूर होगा। खासतौर पर आईएस और खुरासान की चुनौती के लिहाज से भी दोनो देशों के बीच सूचनाओं का आदान प्रदान जरूरी है।

चीन के मुकाबले सहयोग बढ़ाने पर जोर
पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि चीन का हमारे मुकाबले दोगुना तीन गुना ज्यादा सहयोग इजरायल के साथ विभिन्न छेत्रों में है। भारत का ध्यान इस लिहाज से भी संतुलन साधने पर होगा।

अरब देशों से खटास नहीं
कूटनीतिक जानकार मानते हैं कि इजरायल से संबंधों की मजबूती से अरब देशों से खटास नहीं आएगी। क्योंकि भारत का अरब देशों के साथ स्वतंत्र तौर पर बेहतर संबंध हैं।

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