सुप्रीम कोर्ट विवादः नहीं सुलझा है न्यायिक संकट, 2-3 दिन में सुलझने की उम्मीद- वेणुगोपाल

Updated on: 21 November, 2019 04:57 AM

सुप्रीम कोर्ट विवाद अभी थमा नहीं है। ऐसा खुद अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि न्यायिक संकट नहीं सुलझा है और इसके 2-3 दिनों में पूरी तरह सुलझने की उम्मीद है।

वहीं इससे पहले सोमवार को अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के जजों के बीच का विवाद समाप्त हो गया है। कोर्ट में सारे काम रूटिन के मुताबिक होंगे।
उधर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में संकट का समाधान इस हफ्ते के अंत तक होने की उम्मीद।

आपको बता दें कि सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) दीपक मिश्रा ने महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई के लिए 5 सदस्यीय संविधान पीठ का गठन किया है। इस पीठ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीजेआई पर आरोप लगाने वाले चारों जज शामिल नहीं हैं।
चारों न्यायाधीशों- न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एम बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ में से किसी का नाम पांच जजों की संविधान पीठ के सदस्यों में नहीं है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार पांच न्यायाधीशों की पीठ में सीजेआई दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए के सीकरी, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति अशोक भूषण शामिल हैं। यह संविधान पीठ 17 जनवरी से कई महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई शुरू करेगी।
इन मामलों की कल से होनी है सुनवाई
1.  जस्टिस के. पुट्टास्वामी बनाम भारत सरकार (आधार हो या न हो) :
क्या आधार वयक्ति की निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है। इसी सवाल का जवाब देने के लिए पांच न्यायाधीशों की पीठ गठित की गई है। हाल में आधार को आवश्यक रूप से सभी सेवाओं, बैंक खातों, मोबाइल फोन आदि से लिंक करने की तिथि 31 मार्च 2018 कर दी गई थी।

2. जोसेफ साइन बनाम केंद्र सरकार
इस मामले में संविधान पीठ देखेगी कि क्या परस्त्रीगमन को दंडित करने तथा इससे संबंधित आईपीसी की धारा को संवैधानिक घोषित करने वाले पूर्व के फैसलों पर फिर से विचार करने की जरूरत है। खासकर सामाजिक प्रगति, मूल्यों में बदलाव, लैंगिक समानता और लैंगिक संवैदनशीलता को देखते हुए क्या यह जरूरी है। पूर्व के फैसलों में जस्टिस वाई.वी. चंद्रचूड़ ने प्रावधान को वैध घोषित करते हुए कहा था कि इससे संविधान के किसी प्रावधान का उल्लंघन नहीं होता। अब दशकों बाद उनके पुत्र जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने इस मामले को विचार के लिए स्वीकार करते हुए टिप्पणी की है कि महिला को वस्तु नहीं समझा जा सकता।
3. यंग लायर्स एसोसिएशन बनाम केरल राज्य :
यह संवेदनशील मामला केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं (10 से 50 वर्ष की) के प्रवेश का है। याचिका में कहा गया है कि महिलाओं के प्रवेश पर रोक लैंगिक समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

4. नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत राज्य :
संविधान इस मामले दो न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले पर फिर से विचार करेगी, जिसने समलैंगिक सबंधों को अपराध मानने वाली आईपीसी की धारा 377 को वैध ठहराया था।

5. गूलरोख एम. गुप्ता बनाम सैम रूसी चौथिया :
पीठ फैसला करेगी कि पारसी महिला के विशेष विवाह कानून (स्पेशल मैरिज एक्ट) के तहत दूसरे धर्म में विवाह करने पर उसका धर्म क्या होगा। हिंदू व्यक्ति से विवाह करने पर इस महिला को पारसियों ने धर्म से बाहर कर दिया था।

6. पब्लिक इंटरेस्ट फाउंडेशन बनाम भारत राज्य :
इस मामले  में कोर्ट फैसला करेगा कि आपराधिक मामलों को सामना कर रहे कानून निर्माताओं को ट्रायल कोर्ट में आरोप तय होने के बाद चुनाव के लिए अयोग्य ठहरा दिया जाना चाहिए।

इसके अलावा संविधान पीठ के समक्ष उपभोक्ता मामले में जवाब देने के लिए समय की सीमा और बिक्री कर के दो मामले भी हैं।  

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