शर्मनाक: घायलों को डायल 100 में ले जाने से पुलिस का इंकार, बोले- गंदी हो जाएगी गाड़ी

Updated on: 22 November, 2019 09:24 AM

यूपी के सहारनपुर के नगर कोतवाली क्षेत्र में गुरुवार रात हुए एक हादसे में पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आया है। बीती देर रात दो नाबालिगों की बाइक अनियंत्रित होकर नाले में जा गिरी, जिस पर दोनो युवकों को मौके पर मौजूद लोगों ने नाले में से निकला, जिनके सिरों में चोट थी और खून बह रहा था। इन लोगों ने मौके पर मौजूद डायल 100 के सिपाहियों से घायलों को अस्पताल पहुंचाने को कहा, लेकिन उन्होंने गाड़ी गंदी होने का हवाला देते हुए गाड़ी में ले जाने से इंकार कर दिया। लोग गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन वह इन युवकों को नहीं ले गये।

देरी से अस्पताल पहुंचें इन दोनों घायलों ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। बीती देर रात नगर कोतवाली दो युवक अर्पित खुराना (17) और सन्नी (17) निवासी सेतिया विहार नुमाइश कैंप मोटर साइकिल से अनियंत्रित होकर बेरी बाग के मंगलनगर चौक पर एक खंभे से टकराने के बाद नाले में जा गिरे, अचानक से हुई तेज आवाज के बाद मौके पर पहुंचें स्थानीय लोगों ने इन दोनो युवकों को घायल अवस्था में नाले से निकाला, जिनके सिर से खून बह रहा था और गंभीर चोटें थी।

लोगों की सूचना पर मौके पर पहुंची डायल 100 से जब इन दोनो घायलों को अस्पताल ले जाने के लिए कहा तो उस पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने कहा कि उनकी गाड़ी गंदी हो जायेगी और वह किसी टैंपों से ले जायें, वह नहीं लेकर जायेंगे, जिसके बाद लोग उनके सामने गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन पुलिसकर्मी नहीं मानें और इस दौरान स्थानीय लोगों ने पुलिसकर्मियों की 3 मिनट 18 सैकेंड की वीडियो भी बनाया जो वायरल हो चुका है।

पुलिसकर्मिंयों के इंकार के बाद स्थानीय लोग इन्हें टैंपों से लेकर जिला अस्पताल पहुंचें और वहां पर पहुंचने के कुछ देर बाद ही उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पुलिसकर्मियों के अमानवीय चेहरे के इस वीडियों की चर्चा हर कहीं हैं और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के साथ ही लोगों का कहना है कि इस घटना से स्पष्ट है कि आपकी सेवा और सुरक्षा में सदैव तत्पर का स्लोगन देने वाली यूपी पुलिस की गाड़ी की सफाई दो युवा जिंदगियों से ज्यादा कीमती है।

एसपी सिटी प्रबल प्रताप सिंह ने कहा कि यह घटना गंभीर है और वह वीडियो को देख रहे हैं और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस और हर आम आदमी का पहला कर्तव्य है कि वह घायलों को अस्पताल पहुंचायें और वह किसी को अस्पताल पहुंचाने से इंकार नहीं कर सकते हैं।

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