बढ़ी ताकतः नौसेना में शामिल हुई पनडुब्बी INS 'करंज', अब समुद्र में छूटेंगे चीन और पाकिस्तान के पसीने

Updated on: 17 July, 2019 12:53 AM

समुद्र में दुश्मनों के होश ठिकाने लगाने वाली स्कॉर्पीन श्रेणी की तीसरी पनडुब्बी आईएनएस 'करंज' आज लॉन्च हो गई। नौसेना प्रमुख सुनील लांबा की मौजूदगी में पनडुब्बी आईएनएस करंज को समुद्र में उतार दिया गया।  आईएनएस करंज को आज मुंबई मझगांव डॉक पर लॉन्च की गई।

आपको बता दें कि पहली स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस कलवरी को 14 दिसंबर 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम समर्पित किया था। कलवरी में पिछली डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की तुलना में बेहतर छुपने वाली प्रौद्योगिकी है। आईएनएस करंज की खास बात यह है कि यह एक स्वदेशी पनडुब्बी है, जो 'मेक इन इंडिया' के तहत तैयार की गई है। कलवरी और खांदेरी के बाद 'करंज' की ताकत देखकर दुश्मनों के पसीने छूट जाएंगे।

ये है 'करंज' की ताकत

अपने आधुनिक फीचर्स और सटीक निशाने की क्षमता वाली स्कॉर्पीन पनडुब्बी 'करंज' दुश्मनों को चकमा देकर सटीक निशाना लगा सकती है। करंज की यह खूबी चीन और पाकिस्तान जैसे देशों की मुश्किलें बढ़ा देगा। इसके साथ ही 'करंज' टॉरपीडो और एंटी शिप मिसाइलों से हमले भी कर सकती है।

युद्ध की स्थिति में करंज पनडुब्बी हर तरह की अड़चनों से सुरक्षित और बड़ी आसानी से दुश्मनों को चकमा देकर बाहर निकल सकती है। यानी इसमें सतह पर पानी के अंदर से दुश्‍मन पर हमला करने की खासियत भी है। इस पनडुब्‍बी को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसे किसी भी तरह की जंग में ऑपरेट किया जा सकता है। यह पनडुब्बी हर तरह के वॉरफेयर, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर और इंटेलिजेंस को इकट्ठा करने जैसे कामों को भी बखूबी अंजाम दे सकती है। बता दें कि कंरज पनडुब्बी 67.5 मीटर लंबा, 12.3 मीटर ऊंचा, 1565 टन वजनी है।

जानें करंज की खास बातें

- करंज रडार की पकड़ में नहीं आ सकता है।
- जमीन पर हमला करने में सक्षम है करंज।
- करंज पनडुब्बी में ऑक्सीजन बनाने की भी क्षमता।
- लंबे समय तक पानी में रह सकती है करंज पनडुब्बी।
इसी महीने लॉन्च हुई थी पनडुब्बी खांदेरी

INS खंडेरी  सबमरीन e
स्कॉर्पीन श्रेणी की दूसरी पनडुब्बी खांदेरी 12 जनवरी 2017 को लॉन्च की गई थी। फ्रांस की रक्षा व ऊर्जा कंपनी डीसीएनएस द्वारा डिजाइन की गईं पनडुब्बियां भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट-75 के तहत बनाई जा रही हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत भारत अगली पीढ़ी की स्वदेशी पनडुब्बियों का निर्माण करेगा। आईएनएस कलवरी के भारतीय नौसेना में शामिल होने से भारत का हिंदमहासागर में दबदवा और बढ़ जाएगा। यह पनडुब्बी नौसेना की ताकत को भी एक अलग सिरे से परिभाषित करेगी।

स्कॉर्पीन श्रेणी की ये हैं पनडुब्बियों
- स्कॉर्पीन श्रेणी की पहली दो पनडुब्बियां 'कलवरी', और 'खांदेरी' है।

- 13 दिसंबर, 2017 को प्रधानमंत्री मोदी ने आइएनएस कलवरी को देश के नाम समर्पित किया था।

- वहीं, खांदेरी पनडुब्बी को 12 जनवरी, 2017 को लॉन्च किया गया था।

- कलवरी और खंडेरी पनडुब्बियां आधुनिक फीचर्स से लैस है।

- यह दुश्मन की नजरों से बचकर सटीक निशाना लगा सकती हैं।

- इसके साथ ही टॉरपीडो और एंटी शिप मिसाइलों से हमले भी कर सकती हैं।

सबमरीन INS कलवरी की खास बातें-

कलवारी  क्लास  सबमरीन
आईएनएस कलवरी में पिछली डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की तुलना में बेहतर छुपने वाली प्रौद्योगिकी है।
इस पनडुब्बी के माध्यम से टारपीडो के साथ एक हमले शुरू किए जा सकते है। यह उष्णकटिबंधीय समेत सभी सेटिंग्स में काम कर सकती हैं। माइन बिछाने, क्षेत्र निगरानी, खुफिया जानकारी और युद्ध गतिविधियों सहित इस गुप्तता वाली पनडुब्बी के माध्यम से कई रक्षा गतिविधियों का संचालन किया जा सकता है। इस पनडुब्बी के माध्यम से पानी की सतह पर या नीचे की सतह से एंटी शिप मिसाइल लॉन्च की जा सकती है। कलवारी को विशेष इस्पात से बनाया गया है । जिससे ये उच्च तीव्रता के हाइड्रोस्टाटिक बल का सामना कर सकती है और महासागरों में गहराई से गोता लगा सकती है।


स्कॉर्पीन-क्लास पनडुब्बी खांदेरी की खास बातें-

स्कॉर्पीन श्रेणी की यह पनडुब्बी अत्याधुनिक फीचरों से लैस है।
इनमें रडार से बच निकलने की इसकी उत्कृष्ट क्षमता और सधा हुए वार कर दुश्मन पर जोरदार हमला करने की योग्यता शामिल है।
यह हमला टॉरपीडो से भी किया जा सकता है और ट्यूब-लॉन्च्ड पोत विरोधी मिसाइलों से भी रडार से बच निकलने की क्षमता इसे अन्य कई पनडुब्बियों की तुलना में अभेद्य बनाएगी।
यह पनडुब्बी हर तरह के मौसम और युद्धक्षेत्र में संचालन कर सकती है।
यह किसी भी अन्य आधुनिक पनडुब्बी की तरह सतह-रोधी युद्धक क्षमता, पनडुब्बी-रोधी युद्धक क्षमता, खुफिया जानकारी जुटाना, क्षेत्र की निगरानी कर सकती है।


P-75 प्रोजेक्ट के तहत बन रही हैं पनडुब्बी
 आईएनएस कलवरी देश में बनी पहली परमाणु पनडुब्बी है जो भारतीय नौसेना में शामिल की गई थी। P-75 प्रोजेक्ट के तहत मुंबई के मझगांव डॉक लीमिटेड में बनी कलवरी क्लास की पहली पनडुब्बी आईएनएस कलावरी है। कलवरी क्लास की 6 पनडुब्बी मुंबई के मझगांव डॉक में एक साथ बन रही हैं और मेक इन इंडिया के तहत इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जा रहा है। कलवरी के बाद खांदेरी और अब प्रोजक्ट की तीसरी पनडुब्बी करंज 31 जनवरी को लॉन्च होगी।


स्कॉर्पीन श्रेणी की दूसरी पनडुब्बी खांदेरी 12 जनवरी 2019 को लॉन्च की गई थी। फ्रांस की रक्षा व ऊर्जा कंपनी डीसीएनएस द्वारा डिजाइन की गईं पनडुब्बियां भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट-75 के तहत बनाई जा रही हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत भारत अगली पीढ़ी की स्वदेशी पनडुब्बियों का निर्माण करेगा। आईएनएस कलवरी के भारतीय नौसेना में शामिल होने से भारत का हिंदमहासागर में दबदवा और बढ़ जाएगा। यह पनडुब्बी नौसेना की ताकत को भी एक अलग सिरे से परिभाषित करेगी।

स्कॉर्पीन श्रेणी की ये हैं पनडुब्बियों
- स्कॉर्पीन श्रेणी की पहली दो पनडुब्बियां 'कलवरी', और 'खांदेरी' है।

- 13 दिसंबर, 2017 को प्रधानमंत्री मोदी ने आइएनएस कलवरी को देश के नाम समर्पित किया था।

- वहीं, खांदेरी पनडुब्बी को 12 जनवरी, 2017 को लॉन्च किया गया था।

- कलवरी और खंडेरी पनडुब्बियां आधुनिक फीचर्स से लैस है।

- यह दुश्मन की नजरों से बचकर सटीक निशाना लगा सकती हैं।

- इसके साथ ही टॉरपीडो और एंटी शिप मिसाइलों से हमले भी कर सकती हैं।

सबमरीन INS कलवरी की खास बातें-
आईएनएस कलवरी में पिछली डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की तुलना में बेहतर छुपने वाली प्रौद्योगिकी है।
इस पनडुब्बी के माध्यम से टारपीडो के साथ एक हमले शुरू किए जा सकते है। यह उष्णकटिबंधीय समेत सभी सेटिंग्स में काम कर सकती हैं। माइन बिछाने, क्षेत्र निगरानी, खुफिया जानकारी और युद्ध गतिविधियों सहित इस गुप्तता वाली पनडुब्बी के माध्यम से कई रक्षा गतिविधियों का संचालन किया जा सकता है। इस पनडुब्बी के माध्यम से पानी की सतह पर या नीचे की सतह से एंटी शिप मिसाइल लॉन्च की जा सकती है। कलवारी को विशेष इस्पात से बनाया गया है । जिससे ये उच्च तीव्रता के हाइड्रोस्टाटिक बल का सामना कर सकती है और महासागरों में गहराई से गोता लगा सकती है।


स्कॉर्पीन-क्लास पनडुब्बी खांदेरी की खास बातें-

स्कॉर्पीन श्रेणी की यह पनडुब्बी अत्याधुनिक फीचरों से लैस है।
इनमें रडार से बच निकलने की इसकी उत्कृष्ट क्षमता और सधा हुए वार कर दुश्मन पर जोरदार हमला करने की योग्यता शामिल है।
यह हमला टॉरपीडो से भी किया जा सकता है और ट्यूब-लॉन्च्ड पोत विरोधी मिसाइलों से भी रडार से बच निकलने की क्षमता इसे अन्य कई पनडुब्बियों की तुलना में अभेद्य बनाएगी।
यह पनडुब्बी हर तरह के मौसम और युद्धक्षेत्र में संचालन कर सकती है।
यह किसी भी अन्य आधुनिक पनडुब्बी की तरह सतह-रोधी युद्धक क्षमता, पनडुब्बी-रोधी युद्धक क्षमता, खुफिया जानकारी जुटाना, क्षेत्र की निगरानी कर सकती है।


P-75 प्रोजेक्ट के तहत बन रही हैं पनडुब्बी
 आईएनएस कलवरी देश में बनी पहली परमाणु पनडुब्बी है जो भारतीय नौसेना में शामिल की गई थी। P-75 प्रोजेक्ट के तहत मुंबई के मझगांव डॉक लीमिटेड में बनी कलवरी क्लास की पहली पनडुब्बी आईएनएस कलावरी है। कलवरी क्लास की 6 पनडुब्बी मुंबई के मझगांव डॉक में एक साथ बन रही हैं और मेक इन इंडिया के तहत इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जा रहा है। कलवरी के बाद खांदेरी और अब प्रोजक्ट की तीसरी पनडुब्बी करंज 31 जनवरी को लॉन्च होगी।

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