एक्सक्लूसिव : CM योगी के आदेश पर अमल, यूपी में खत्म होंगे एक हजार फिजूल के कानून

Updated on: 13 December, 2019 07:48 AM

पीएम मोदी ने वायदा किया था कि भाजपा सरकार हर दिन एक कानून को खत्म करेगी। सीएम योगी की सरकार उस एजेंडे पर आगे बढ़ रही है। प्रदेश में जल्द एक हजार ऐसे कानूनों को खत्म करने की तैयारी है जो अब महत्वहीन हैं। अंग्रेजी शासन के यह नियम-कानून निष्प्रयोज्य यानि अर्थहीन हैं। इनकी जगह दूसरे कानून भी बन चुके हैं लेकिन इन्हें खत्म नहीं किया गया। प्रदेश के कानून मंत्री बृजेश पाठक का कहना है कि सरकार आगामी सत्र में इसे लेकर विधेयक लाने जा रही है।
राष्ट्रीय विधि आयोग ने सभी राज्यों को सलाह दी थी कि ऐसे सभी अधिनियमों को जो अब काम के नहीं रहे, खत्म कर दिया जाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कानून मंत्रालय ने इस पर अमल शुरू कर दिया। आगरा प्रवास के दौरान सूबे के कानून मंत्री बृजेश पाठक ने  बताया कि पूर्व में कुछ कानून सरकार खत्म कर चुकी है। जबकि अभी करीब एक हजार ऐसे अधिनियम हैं जिनको खत्म करने की तैयारी है। दरअसल इन कानूनों की जगह अब राज्य के पास अपने नए नियम-कानून हैं। मसलन अंग्रेजी शासन में बना मिर्जापुर खनन अधिनियम। यूपी के पास अपनी खनन नीति है ऐसे में मिर्जापुर खनन अधिनियम का कोई महत्व नहीं रह गया। इन कानूनों को लेकर संबंधित विभागों से अनापत्ति भी प्रदेश सरकार ने ले ली है।

कुछ कानून जो होंगे खत्म
द अवध स्टेट एक्ट 1869 (1ऑफ1869), द अवध तालुकेदार्स रिलीफ एक्ट 1870 (24ऑफ 1870), द किंग ऑफ अवध स्टेट एक्ट 1887 (19ऑफ 1887), द किंग ऑफ अवध स्टेट एक्ट 1888 (14ऑफ 1888), द यूनाइटेड प्रोविंसेज एक्ट 1890 (20ऑफ 1890), द किंग ऑफ अवध स्टेट वैलीडेशन एक्ट 1917 (12ऑफ 1917), द अवध लॉज एक्ट 1876, सेल्स ऑफ लैंड फॉर रेवेन्यू एरियर्स (1सन1845), बाउंड्रीज (1सन1847), द फोरफीटेड डिपोजिट एक्ट (35सन1850), इंप्रूवमेंट इन टाउंस (26सन1850), द रेंट रिकवरी एक्ट 1853, बेस्ट लैंड (क्लेम्स) एक्ट, 1863, द सरायस एक्ट 1867, द कोरोनर्स एक्ट 1871, द लॉज लोकल एक्सटेंट एक्ट 1874, द एग्रीकल्चरिस्ट लोन्स एक्ट 1884, द लोकल अथॉरिटी लोन्स एक्ट 1914, द पुलिस (इनसाइनटमेंट एंड डिस्अफेक्शन) एक्ट 1922, सिख गुरुद्वाराज (सप्लीमेंटरी) एक्ट 1925

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