मिसालः मुसलमानों ने खुद ही हटवा दी मस्जिद, जानिये क्यों किया ऐसा

Updated on: 22 October, 2019 03:00 PM

जहां एक ओर देश में राममंदिर निर्माण और बाबरी मस्जिद को दूसरे स्थान पर बनाने को लेकर बहस चल रही है और बाबरी मस्जिद स्थानांतरण पर बयान देने पर सलमान नदवी के खिलाफ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कार्रवाई कर दी है।

वहीं मुजफ्फरनगर में लाखों लोगों को रास्ता देने के लिए संधावली गांव में स्थित मस्जिद को एनएचआई से बातचीत के बाद मुस्लिम लोगों ने खुद ही हटाने का निर्णय किया। इस मस्जिद के कारण हाईवे पर संधावली पर रेलवे ओवरब्रिज की एक लेन अधूरी पड़ी हुई थी, जिससे सैकड़ों दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और पिछले दस साल में करीब 50 लोगों की मौत का कारण यह अधूरा पुल था। मुजफ्फरनगर में दिल्ली से देहरादून तक का राष्ट्रीय राजमार्ग 58 होकर निकलता है। इसे नेशनल हाईवे घोषित करने के बाद जब चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण का नोटिफिकेशन हुआ तो इसमें संधावली गांव में सड़क के किनारे सूजडू निवासी मेंहदी हसन की भूमि भी थी।इस जमीन पर कारी अमीर अहमद ने मदरसा और मस्जिद बनाई हुई थी। हाईवे चौड़ीकरण की भूमि में मदरसे का कुछ भाग व मस्जिद भी आ रही थी। यहां पर रेल लाइन पर रेलवे ओवरब्रिज भी बनाया जाना था। हाईवे चौड़ीकरण के समय संधावली का रेलवे ओवरब्रिज एक ओर की लेन तो पूरी तैयार हो गई जबकि संधावली की साइड वाली लेन को दोनों ओर से अधूरा छोड़ दिया गया। बीच में मस्जिद खड़ी थी। पिछले दस वर्षों से नेशनल हाईवे अथोरिटी इस अधूरे पुल को बनाने के काम में जुटी थी और मदरसे व मस्जिद के मुतवल्ली कारी अमीर अहमद व उनके पुत्र हिफ्जुर्रहमान से बातचीत का दौर जारी था। बताया जाता है कि इस दौरान जमीयत उलेमा के अध्यक्ष अरशद मदनी भी मदरसे और मस्जिद का निरीक्षण करने के लिए पहुंचे थे। लगातार अधूरे पुल से दुर्घटना हो रही थी। भूमि के स्वामी मेहंदी हसन के पुत्र इल्तफात राणा और सरताज राणा आदि ने प्रशासन को कह दिया था कि मस्जिद और मदरसे के मुतवल्ली कारी अमीर अहमद और उनके पुत्र हिफ्जुर्रहमान ही इस बारे में कोई निर्णय लेंगे। भाजपा सांसद संजीव बालियान भी लगातार इस अधूरे पुल को पूरा करने के लिए प्रशासन पर दबाव बनाए हुए थे। आखिरकार मस्जिद के मुतवल्ली कारी अमीर अहमद और हिफ्जुर्रहमान ने प्रशासन से वार्ता कर बिना किसी राजनीति के हाईवे पर सफर करने वाले लाखों लोगों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए इस मस्जिद और मदरसे का एक भाग हटाने का निर्णय लिया। एनएचआई ने गुरुवार को उनके खाते में मुआवजे के रूप में मस्जिद व मदरसे के भवन 40 लाख रुपए भेज दिए। ऐसे में देर सायं प्रशासन ने मस्जिद के मुतवल्ली के पुत्र हिफजुर्रहमान की उपस्थिति में मस्जिद को हटा दिया। देर रात मस्जिद और मदरसे का वह भाग पूरी तरह से हटा दिया गया जो यातायात में बाधक था। अब इस मस्जिद को दूसरे स्थान पर बनाने की बात मुतवल्ली के पुत्र हिफ्जुर्रहमान ने कही। इस दौरान सीओ खतौली राजीव कुमार, इंस्पेक्टर मंसूरपुर केपीएस चहल, इंस्पेक्टर सिविल लाइन्स डीके त्यागी, इस मस्जिद को हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तहसीलदार रणजीत कुमार, एसडीएम सदर कुमार धर्मेन्द्र और राजस्व विभाग की टीम व भारी पुलिस बल उपस्थित रहा।

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