तिहाड़: जेल में बंद कैदियों का नया हथियार बना सूचना का अधिकार

Updated on: 01 June, 2020 09:36 AM

इस मौस में क्यों हमें नींबू नहीं किया जा रहा है? क्या हम सुबह दो ग्लास दूध पीने के हक़दार है?  और कितने दिन बाद हमें छोड़ दिया जाएगा? क्यों हमें मच्छरों भगानेवाला मॉस्क्यूटो क्वाइल नहीं दिया जा रहा है?

ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिन्हें दिल्ली के तिहाड़ जेल में सज़ा काट रहे कैदियों ने सूचना के अधिकार (राइट टू इनफॉर्मेशन एक्ट) का इस्तेमाल कर जेल प्रशासन से पूछा है। जेल मुख्यालयों जहां पर कई सीनियर अधिकारी रहते हैं और प्रशासनिक कार्य होता है वहां पर औसतन रूप से रोजाना ऐसे दो आरटीआई लगाई जा रही है।

दिसंबर के महीने में करीब 70 से ज्यादा आवेदन लगाए गए थे। जबकि, जनवरी में ऐसे 59 आरटीआई आवेदन लगाए गए। कैदियों को आरटीआई की फीस देने से छूट दी गई है।

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