रोटोमैक घोटाला: हिरासत में लिये गए विक्रम कोठारी, सीबीआई कर रही है पूछताछ

Updated on: 15 November, 2019 04:58 PM

हीरों के कारोबारी नीरव मोदी के बैंक घोटाले के बाद अब रोटोमैक कंपनी के मालिक पर कई बैंकों को करोड़ों का चूना लगाने का आरोप है। रोटोमैक पेन कंपनी के चेयरमैन विक्रम कोठारी पर आरोप लगा है कि वो विभिन्न बैंकों को 4000 करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लगाकर कथित तौर पर विदेश भाग गए हैं। हालांकि उनका कहना है कि वो भागे नहीं हैं।

वहीं, सीबीआई ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए विक्रम कोठारी पर मामला दर्ज किया है और उन्हें हिरासत में भी ले लिया गया है। जानकारी के मुताबिक सीबीआई विक्रम कोठारी के साथ उनकी पत्नी और बच्चों से भी पूछताछ कर रही है। इसके अलावा सीबीआई ने उनके कानपुर स्थित घर पर रेड मारी है।

इन बैंकों ने लगाया आरोप
सूत्रों के मुताबिक कोठारी पर इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया समेत कई सार्वजनिक बैंकों को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। बताया जा रहा है कि कानपुर के कारोबारी कोठारी ने पांच सार्वजनिक बैंकों से 800 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज लिया था। सूत्रों के अनुसार कोठारी को ऋण देने में इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने नियमों के पालन में ढिलाई की। स्थानीय मीडिया की रपटों के अनुसार कंपनी के प्रवर्तक ने उनके विदेश भाग जाने की आशंकाओं को आधारहीन करार दिया है।

 
कोठारी का दावा- कहीं नहीं भागा हूं
उधर घोटाले का आरोप लगने के बाद कोठारी ने कहा, 'मैं कानपुर का वासी हूं और मैं शहर में ही रहूंगा। हालांकि कारोबारी काम की वजह से मुझे विदेश यात्राएं भी करनी होती हैं।' बता दें कि कोठारी ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से 485 करोड़ रुपये और इलाहाबाद बैंक से 352 करोड़ रुपये का लोन लिया था। उन्होंने लोन लेने के साल बाद कथित तौर पर ना तो मूलधन चुकाया और ना ही उस पर बना ब्याज दिया। पिछले साल ऋण देने वाले बैंकों में शामिल बैंक ऑफ बड़ौदा ने रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड को जानबूझकर ऋणचूक करने वाला (विलफुल डिफॉल्टर) घोषित किया था।

इस सूची से नाम हटवाने के लिए कंपनी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की शरण ली थी। जहां मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी.बी.भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने कंपनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे सूची से बाहर करने का आदेश दिया था। न्यायालय ने कहा था कि ऋण चूक की तारीख के बाद कंपनी ने बैंक को 300 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति की पेशकश की थी, बैंक को गलत तरीके से सूची में डाला गया है। बाद में रिजर्व बैंक द्वारा तय प्रक्रिया के अनुसार एक प्राधिकृत समिति ने 27 फरवरी 2017 को पारित आदेश में कंपनी को जानबूझ कर ऋण नहीं चुकाने वाला घोषित कर दिया।

गौरतलब है कि यह जानकारी ऐसे समय सामने आयी है जब महज एक सप्ताह पहले पंजाब नेशनल बैंक में करीब 11,400 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी खुलासा हुआ है। फिलहाल CBI ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की ब्रैडी रोड शाखा के समूचे परिसर को अपने नियंत्रण में ले लिया और गहन तलाशी अभियान शुरू किया।

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