सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा कोर्ट के निर्णय के बाद ही कराई जाए

Updated on: 21 April, 2019 04:28 PM

यूपी-टीईटी परीक्षा में उत्तरमाला सम्बंधी विवाद का असर सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा- 2018 पर पड़ता नजर आ रहा है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए, महाधिवक्ता से उम्मीद जताई है कि वह सम्बंधित विभाग को सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा वर्तमान याचिका का निपटारा होने के बाद ही कराने की सलाह देंगे।

मामले की अग्रिम सुनवाई के लिए 26 फरवरी की तिथि लगाते हुए, न्यायालय ने राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल कर बताने का निर्देश दिया है कि उसके अपने ही दिशा-निर्देशों के अनुसार य़ूपी-टीईटी- 2017 की परीक्षा क्यों नहीं करवाई गई।

यह आदेश न्यायमूर्ति आरएस चौहान की एकल सदस्यीय पीठ ने मोहम्मद रिजवान व 103  अन्य समेत दर्जनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए दिया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार का पक्ष रखने के लिए महाधिवक्ता उपस्थित रहे। उन्होंने बेहतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए और समय दिए जाने की गुजारिश की। जिस पर न्यायालय ने उन्हें एक सप्ताह का समय देते हुए, हलफनामे में यह बताने को कहा कि टीईटी परीक्षा में सरकार के खुद के दिशा-निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया। न्यायालय ने यह भी पूछा है कि उत्तरमाला की जांच के लिए विशेषज्ञ कमेटी कब गठित की गई व कमेटी में कौन-कौन से सदस्य थे। न्यायालय ने इस बात का भी जवाब मांगा है कि भाषा सम्बंधी प्रश्नपत्र में अपठित गद्यांश से सम्बंधित प्रश्न दिशा-निर्देशों के अनुरूप क्यों नहीं पूछे गए।

उल्लेखनीय है कि उक्त याचिका में यूपी-टीईटी 2017 के परीक्षा से सम्बंधित उत्तरमाला को चुनौती दी गई है। याचिकाओं में परीक्षा में पूछे गए कई प्रश्नों का मामला उठाया गया है। याचिकाओं में कहा गया है कि परीक्षा में 16 प्रश्न संशयात्मक हैं, पांच प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर के पूछे गए हैं और कुछ प्रश्न गाइडलाइंस के मुताबिक नहीं हैं। न्यायालय ने इस मामले में 2 फरवरी और 9 फरवरी के आदेश के द्वारा याचियों को राहत देते हुए सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि बढा दी थी। राज्य सरकार ने उक्त आदेश को विशेष याचिका दाखिल करते हुए चुनौती दी थी जो कि खारिज हो चुकी है।

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