उप-चुनाव 2018: 2019 में मोदी के रथ को रोक पाएगी ‘बुआ-बबुआ’ की जोड़ी

Updated on: 27 June, 2019 08:42 AM

जिन कारणों ने 2017 में अखिलेश सरकार की विदाई करा दी थी, लगभग उन्हीं कारणों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके अपराजेय गढ़ गोरखपुर सदर सीट पर हार का मुंह देखने को मजबूर कर दिया। 29 साल से जीत के लिए तरस रहीं सपा-बसपा और सहयोगी पार्टियां बल्लियों उछल रही हैं तो भाजपाइयों को हार पर जवाब देते नहीं बन रहा। गोरक्षपीठ के गहरे प्रभाव वाली सीट पर विपक्ष की (22 हजार वोटों से) जीत को असामान्य घटना के रूप में देखा जा रहा है। लोगों को यकीन नहीं हो रहा है कि भाजपा अपने अजेय दुर्ग में ही ढह गई। इस हार का संदेश दूर तक जाएगा।

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