राज्यसभा चुनाव: वर्चस्व की जंग के लिए हो रही है भारी जोड़-तोड़

Updated on: 16 October, 2019 11:02 AM

राजनीतिक वर्चस्व की जंग में राज्यसभा चुनाव अब लोकसभा चुनाव से भी ज्यादा हाई वोल्टेज ड्रामा में तब्दील होते जा रहे हैं। कुछ महीने पहले हुए गुजरात और अब उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में मतगणना को न सिर्फ रोकनी पड़ा, बल्कि चुनाव आयोग के हस्तक्षेप के बाद ही आगे बढ़ा जा सका। संसद के उच्च सदन राज्यसभा को भले ही संभ्रात व बुद्धिजीवियों के सदन का तमगा हासिल हो, लेकिन उसके चुनाव अब सबसे ज्यादा जोड़ तोड़ व ताकत के प्रतीक बन गए हैं।
 
राज्यसभा चुनावों में पहले सबसे ज्यादा चर्चा में झारखंड रहता था जहां से बड़े उद्योगपति चुनाव मैदान में उतरते रहे हैं। वहां धन बल के जरिए विधायकों की खरीद फरोख्त के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन अब यह चुनाव हर राज्य में राजनीतिक वर्चस्व की जंग के हाई वोल्टेज ड्रामा में बदल गए है। दूसरे दलों में सेंध लगाकर अपनी क्षमता से अतिरिक्त उम्मीदवार को जिताने की होड़ बढ़ती जा रही है। गुजरात की तरह राजनीतिक प्रतिष्ठा की जंग को उत्तर प्रदेश में भी दोहराया गया।

गुजरात में कांग्रेस नेता अहमद पटेल के चुनाव का हाईवोल्टेज ड्रामा तो आधी रात तक चला था। भाजपा व कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने कई दौर में दिल्ली में चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाकर अपने अपने पक्ष में मजबूत दावे पेश किए थे। अब उत्तर प्रदेश में दसवीं सीट के चुनाव में किसी के पास एक दल के पास पर्याप्त विधायक न होने से उसके लिए भी चुनावी जंग हुई। सत्तारूढ़ भाजपा ने नई नई सपा-बसपा की दोस्ती को चुनौती देते हुए अपना नौवां उम्मीदवार उतार कर चुनाव को गरमा दिया।

गुजरात की तरह उत्तर प्रदेश में भी कुछ विधायकों के अपने पार्टी एजेंट को मतपत्र न दिखाने का मामना उठा और चुनाव आयोग को हस्तक्षेप करना पड़ा। कुछ घंटे के बाद आयोग ने मतगणना शुरू कराई, लेकिन इसके पहले लऊनऊ में दिन भर जोड़ तोड़ा का हाई वोल्टेज ड्रामा चला और पर्दे के पीछे समीकरण बनते बिगड़ते रहे। झारखंड, कर्नाटक व पश्चिम बंगाल में भी जोड़ तोड़ चली।

आम तौर पर विधानसभा में विभिन्न दलों की ताकत के हिसाब से राज्यसभा चुनाव में उतने ही उम्मीदवार उतरते हैं जितनी सीटें होती है। लेकिन कुछ राज्यों में एक-दो सीट ऐसी होती हैं जिनको कोई एक दल या गठबंधन नहीं जीत सकता है। ऐसे में वहां पर जोड़ तोड़ शुरू होती है। हालांकि नए मामलों में अब कुछ सीटों को हर हाल में जीतने और कुछ पर विरोधी को मात देने के लिए भी जोड़ तोड़ का सहारा लिया जा रहा है।

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